अमेरिका में ढाई करोड़ और 3 महीने का इंतजार, कानपुर में मरीज को मिला 40 हजार में नया जीवन
- US से इलाज के लिए भारत आए एक मरीज की कानपुर के डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर जान बचा ली। मरीज की रीढ़ की हड्डी के पास खत...
- में 2.5 करोड़ की सर्जरी भारत में 40000 में करने के बाद स्वस्थ व्यक्ति
- भारत के मेडिकल टूरिज्म की सबसे बड़ी मिसाल कहें या कानपुर के डॉक्टरों का कमाल, अमेरिका के शिकागो से इलाज कराने आए 70 व...
Chicago to Kanpur Spine Surgery: US से इलाज के लिए भारत आए एक मरीज की कानपुर के डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर जान बचा ली। मरीज की रीढ़ की हड्डी के पास खतरनाक गांठ थी, जिससे पैरालिसिस का खतरा था। USA में इसके इलाज के लिए ढाई करोड़ रुपये और महीनों का इंतजार बताया गया था, जबकि कानपुर में महज 40 हजार रुपये में सफल ऑपरेशन कर मरीज को नई जिंदगी दी गई।

US में 2.5 करोड़ की सर्जरी भारत में 40000 में करने के बाद स्वस्थ NRI व्यक्ति
Medical Tourism India: भारत के मेडिकल टूरिज्म की सबसे बड़ी मिसाल कहें या कानपुर के डॉक्टरों का कमाल, अमेरिका के शिकागो से इलाज कराने आए 70 वर्षीय बुजुर्ग को कानपुर में मिली नई जिंदगी ।
अमेरिका में जहां डॉक्टरों ने रीढ़ की सर्जरी के लिए ढाई करोड़ रुपये का खर्च और 3 महीने की लंबी वेटिंग बता दी थी, वहीं कानपुर के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने महज 40 हजार रुपये में जटिल ऑपरेशन कर बुजुर्ग की जान बचा ली। अगर समय पर ऑपरेशन न होता तो बुजुर्ग को हमेशा के लिए पैरालिसिस हो सकता था।
शिकागो से कानपुर तक का सफर
प्राप्त जानकारी के अनुसार 70 वर्षीय संजीव जोहरी पिछले कई सालों से अमेरिका के शिकागो (Chicago) में रहते हैं। कुछ महीने पहले उन्हें पीठ में असहनीय दर्द शुरू हुआ। उन्होंने शिकागो के बड़े अस्पतालों में दिखाया तो डॉक्टरों ने एमआरआई (MRI) के बाद बताया कि उनकी रीढ़ की हड्डी के पास एक खतरनाक एपिडर्मल सिस्ट बन गई है जो सीधे स्पाइनल कॉर्ड को टच कर रही है।
अमेरिकी डॉक्टरों ने कहा कि तुरंत सर्जरी ( spinal surgery) करनी होगी, लेकिन इसके लिए करीब 3 लाख डॉलर यानी लगभग ढाई करोड़ रुपये का खर्च आएगा और बीमा अप्रूवल के बाद भी 3 महीने इंतजार करना पड़ेगा।
दर्द से तड़प रहे संजीव जोहरी ने भारत आने का फैसला किया। भारत में वह सोशल मीडिया पर कानपुर के एक डॉक्टर का वीडियो देख रहे थे। वीडियो देखकर उन्हें भरोसा हुआ और वह दिल्ली एयरपोर्ट उतरते ही सीधे कार से कानपुर के लिए रवाना हो गए।
कानपुर में जांच में निकली खतरनाक गांठ
कानपुर पहुंचने पर उनकी मुलाकात डॉ. हरीश दीक्षित से हुई। डॉक्टर ने तुरंत उनका सीटी स्कैन और एमआरआई कराया। जांच में सामने आया कि रीढ़ की हड्डी के बिल्कुल पास एक बड़ी और बदबूदार एपिडर्मल सिस्ट है।
डॉ. दीक्षित ने बताया कि यह सिस्ट बहुत ही खतरनाक जगह पर थी। अगर इसमें थोड़ी भी देरी होती तो यह स्पाइनल कॉर्ड को दबा देती और मरीज को नीचे के हिस्से में हमेशा के लिए लकवा मार जाता।
सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मरीज सीवियर डायबिटीज से पीड़ित था। शुगर बहुत ज्यादा होने पर सर्जरी में इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
पहले शुगर कंट्रोल, फिर हुई जटिल सर्जरी
डॉक्टरों ने तुरंत एक टीम बनाई। डाइटिशियन और फिजिशियन की मदद से पहले 24 घंटे में मरीज की शुगर को कंट्रोल किया गया। डाइट कंट्रोल और दवाओं से शुगर नॉर्मल रेंज में आई तो अगले ही दिन ऑपरेशन थियेटर (OT) में ले जाया गया।
करीब 2 घंटे तक चली जटिल सर्जरी में डॉक्टरों ने रीढ़ की हड्डी और नसों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए पूरी सिस्ट को बाहर निकाल दिया। ऑपरेशन के दौरान एक बार भी स्पाइन को टच नहीं होने दिया गया। मरीज को बिल्कुल भी ज्यादा दर्द नहीं हुआ।
मरीज ने कहा – अमेरिका में मौत दिख रही थी, कानपुर में जीवन मिल गया
ऑपरेशन के बाद मरीज संजीव जोहरी ने कहा कि अमेरिका में जब डॉक्टरों ने ढाई करोड़ रुपये मांगे तो उन्हें लगा कि अब जीवन खत्म है। इतना पैसा और 3 महीने तक दर्द सहना मुश्किल था।
लेकिन कानपुर में महज 35 से 40 हजार रुपये में उनका सफल ऑपरेशन हो गया। आज वह 99.9 प्रतिशत ठीक हैं और अपने पैरों पर चल रहे हैं। जल्द ही उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
डॉ. हरीश दीक्षित ने बताया कि यह केस भारत में सस्ती और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का उदाहरण है।