Kanpur Illegal Rudra Hospital News: कानपुर में अवैध अस्पताल की गुंडागर्दी, युवक की मौत पर हंगामा, परिजनों को 40-50 गुंडों ने पीटा, रिटायर्ड दरोगा सहित 5 लहूलुहान*
- Kanpur Illegal Rudra Hospital News: कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नया शिवली रोड पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ...
- Illegal Hospital kanpur : उत्तर प्रदेश में कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में रविवार देर रात एक अवैध रूप से संचालित...
- अस्पताल के बहार मृतक युवक की रोती बिलखती बहनें व परिजन
Kanpur Illegal Rudra Hospital News: कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नया शिवली रोड पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ठीक सामने गली में अवैध रूप से संचालित हो रहे रुद्रा अस्पताल में मरीज की मौत के बाद जमकर हुआ हंगामा। रिटायर दरोगा सहित पांच लोग गंभीर रूप से हुए घायल, घटना को अंजाम देने वाले 40 से 50 गुंडों की तलाश में जुटी पुलिस।
घटना में घायल रिटायर्ड दरोगा और डॉक्टर
Illegal Hospital kanpur : उत्तर प्रदेश में कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में रविवार देर रात एक अवैध रूप से संचालित हो रहे निजी अस्पताल में मरीज की मौत पर जमकर बवाल हुआ।नया शिवली रोड़ स्थित बारासिरोही के रुद्रा हॉस्पिटल में गाय के सींग मारने से घायल 25 साल के युवक प्रांशु यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई।
अस्पताल के बहार मृतक युवक की रोती बिलखती बहनें व परिजन
मौत के बाद जब परिजन अस्पताल पहुंचे और लापरवाही का आरोप लगाया तो अस्पताल संचालक ने 40 से 50 गुंडे बुला लिए और परिजनों पर ईंट-पत्थरों से हमला करवा दिया।
इस हमले में मृतक युवक के मौसा रिटायर्ड दरोगा बलवान सिंह (60), उनके दो बेटे डॉ. आशू यादव और इंजीनियर अंकित समेत 5 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया।
क्या है पूरी घटना ?
कानपुर देहात के मैथा क्षेत्र का रहने वाला 25 वर्षीय प्रांशु यादव छह दिन पहले गाय के द्वारा किये गये हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिजनों ने उसे कल्याणपुर के बारासिरोही स्थित रुद्रा अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि यह अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहा है। यहां एक भी योग्य ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं है।
प्रांशु की हालत लगातार बिगड़ रही थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन के झोलाछाप डॉक्टर रोज यही कहता रहा कि मरीज की हालत में सुधार हो रहा है।वहीं परिजन बार-बार न्यूरो स्पेशलिस्ट को बुलाने की मांग करते रहे, लेकिन अस्पताल के संचालक टाल-मटोल करते रहे । रविवार को जब बहुत कहने पर एक न्यूरो विशेषज्ञ को बुलाया गया तो उसने प्रांशु की हालत बेहद गंभीर बताई,और कुछ ही देर बाद उसकी इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घायल डॉ आशु के द्वारा घटना के संबंध में दी गई जानकारी
मौत के बाद बुलाए 40-50 गुंडे, IPD फाइल छीनने की कोशिश
प्रांशु यादव की मौत की खबर मिलते ही उसके परिजन रोते-बिलखते अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से कहा कि वे घटना के बारे में पुलिस को सूचना देंगे और मरीज की IPD फाइल और जांच-रिपोर्ट पुलिस को सौंपेंगे। इसी बात पर अस्पताल संचालक अतुल, अनुज और नवनीत यादव भड़क गए।
परिजनों का आरोप है कि संचालकों ने तुरंत फोन करके 40 से 50 अज्ञात गुंडे बुला लिए। गुंडों ने आते ही परिजनों से मरीज की IPD फाइल और रिपोर्ट छीनने की कोशिश की। जब परिजनों ने फाइल देने से मना किया तो आये हुए गुंडों ने ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से उन पर हमला कर दिया। पूरे अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई।
इस पथराव में रिटायर्ड दरोगा बलवान सिंह के आँख के नीचे गंभीर चोट आई , उनके बड़े बेटे डॉ. आशू का सर फट गया और छोटे बेटे को भी गंभीर चोटें आईं। अस्पताल पक्ष के दो लोग अतुल और अनुज भी घायल बताए जा रहे हैं।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, जांच शुरू
हंगामे की सूचना मिलते ही कल्याणपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया और सभी घायलों को बारासिरोही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC ) में भर्ती कराया।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि अस्पताल में हंगामा और मारपीट की सूचना मिली थी। दोनों पक्षों से तहरीर ली जा रही है। मुकदमा दर्ज कर जांच की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि रुद्रा अस्पताल वैध है या अवैध रूप से चल रहा है। सीएमओ से भी अस्पताल के दस्तावेजों की जांच कराई जाएगी।
मृतक के परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप।
मृतक प्रांशु यादव के परिजनों के द्वारा अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ के ऊपर कई गंभीर आरोप लगाये हैं।
अस्पताल प्रबंधन और उनके गुंडो के द्वारा की गई मारपीट में घायल डॉ. आशु यादव अस्पताल के ऊपर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि…
1. अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन अवैध रूप से कैसे और किसके संरक्षण में संचालित हो रहा।
2. अस्पताल में गंभीर मरीज होने के बाद भी एक भी प्रशिक्षित ड्यूटी डॉक्टर क्यों नहीं है मौजूद।
3. अस्पताल में मौजूद नर्सिंग स्टाफ की कार्यशैली देखते हुए उनकी डिग्री या डिप्लोमा पर भी संदेह है।
4. झोलाछाप अस्पताल संचालक मरीज का कर रहे थे इलाज आखिर उनका किसने दिया इसका अधिकार।
5.DCPO दवाइयां भी सरकार के द्वारा तय की गई MRP से कई गुना ज्यादा कीमत पर बेची जा रही थी।
6. अस्पताल के अंदर मेडिकल स्टोर अवैध रूप से संचालित हो रहा है।
7. गंभीर मरीज होने के बाद भी बिना ICU के उसका इलाज किया जा रहा था।
8. अस्पताल प्रबंधन के द्वारा मरीज की हालत के बारे में लगातार परिजनों को गुमराह किया जा रहा था।
9. परिजनों के द्वारा बहुत विनती करने पर न्यूरो विशेषज्ञ को बुलाकर दिखाया गया।
बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे अवैध अस्पतालो पर कब होगी कार्रवाई
कानपुर में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों की भरमार है। बिना रजिस्ट्रेशन, बिना योग्य डॉक्टरों के ये अस्पताल लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। बारासिरोही इलाके में ही दर्जनों ऐसे अस्पताल चल रहे हैं। आखिर कानपुर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कब इन पर लगाम लगाते हुए कठोर कार्रवाई करेंगे?