कानपुर में डॉक्टर को 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा, 48 लाख ऐंठे – महिला समेत 3 शातिर गिरफ्तार, चौथा फरार
- स्वरूप नगर में रहने वाले 72 साल के एक डॉक्टर को हफ्ते भर तक डिजिटल बंधक बनाकर 48 लाख रुपये लूटने वाले गैंग का कानपुर ...
- प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पेश किए गए आरोपी
- उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर ठगों के एक बड़े गैंग का पर्दाफाश हुआ है। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट...
Kanpur Digital Arrest Fraud: स्वरूप नगर में रहने वाले 72 साल के एक डॉक्टर को हफ्ते भर तक डिजिटल बंधक बनाकर 48 लाख रुपये लूटने वाले गैंग का कानपुर साइबर पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने तीन जालसाजों को दबोचा है, जिनमें एक महिला भी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पेश किए गए आरोपी
Kanpur Cyber Crime News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर ठगों के एक बड़े गैंग का पर्दाफाश हुआ है। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। इस गैंग ने कानपुर के एक वरिष्ठ चिकित्सक को 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनसे 48 लाख रुपये की ठगी की थी।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गैंग अब तक 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुका है और इसके खिलाफ उन्नाव, दिल्ली और महाराष्ट्र में भी मुकदमे दर्ज हैं।
कैसे फंसाया डॉक्टर को?
जानकारी के मुताबिक, पीड़ित डॉक्टर का नाम योगेश्वर मिश्रा है। ठगों ने उन्हें फोन कर खुद को ईडी और सीबीआई का सीनियर ऑफिसर बताया। फोन पर कहा गया कि उनके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है और उनके बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन हुआ है।
डराने के लिए ठगों ने वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी जैसी ड्रेस पहनकर और फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर उन्हें धमकाया। कहा गया कि अगर उन्होंने किसी को बताया या फोन काटा तो तुरंत गिरफ्तारी होगी। इसी डर से डॉक्टर 7 दिनों तक घर में ही डिजिटल अरेस्ट में रहे और ठगों के कहने पर आरटीजीएस के जरिए 48 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
जब ठगी का अहसास हुआ तो डॉक्टर ने कानपुर साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।
महिला समेत 3 गिरफ्तार, फर्जी कंपनी का खेल
अपर पुलिस उपायुक्त साइबर अपराध अरीबा नोमान ने बुधवार को प्रेसवार्ता में पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 30 सितंबर को साइबर टीम को यह बड़ी सफलता मिली।
जांच में पता चला कि 48 लाख में से 25 लाख रुपये एक फर्म के खाते में ट्रांसफर हुए थे। जब उस खाते की जांच की गई तो वह प्रतापगढ़ में चल रही एक फर्म के नाम पर निकला, जिसके मालिक वासु और कंचन हैं।
पुलिस ने बताया कि वासु और कंचन ने एक शैल कंपनी, यानी कागजों पर चलने वाली फर्जी कंपनी बना रखी थी। इस कंपनी के नाम पर उन्होंने 10 से ज्यादा म्यूल अकाउंट, यानी किराए पर लिए गए बैंक खाते खोल रखे थे। ठगी का पैसा इन्हीं खातों में घुमाया जाता था।
तीसरा आरोपी आतिश था, जिसका मोबाइल नंबर ठगी के लिए इस्तेमाल होता था। आतिश ही लोगों को कॉल करके डराता-धमकाता था। एनसीआरपी पोर्टल पर आतिश के नंबर के खिलाफ पहले से 4 शिकायतें दर्ज थीं।
पुलिस ने वासु, कंचन और आतिश को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गैंग का चौथा सदस्य मुकुल चौबे अभी फरार है। उसे पकड़ने के लिए टीमें लगा दी गई हैं।
अरीबा नोमान (IPS), अपर पुलिस उपायुक्त कमिश्नरेट कानपुर नगर द्वारा दी गई बाइट
पुलिस की अपील – 1930 पर करें कॉल
डीसीपी अरीबा नोमान ने आम लोगों से अपील की है कि अगर कोई भी व्यक्ति खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या किसी भी सरकारी एजेंसी का अफसर बताकर फोन पर डराए, डिजिटल अरेस्ट की बात कहे, तो तुरंत फोन काट दें।
उन्होंने साफ कहा कि कोई भी असली सरकारी एजेंसी कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह से धमकाकर पैसे नहीं मांगती और न ही डिजिटल अरेस्ट करती है।
अगर ऐसा कोई कॉल आए तो तुरंत नजदीकी थाने में सूचना दें या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। साथ ही अपना बैंक अकाउंट, ओटीपी या कोई भी निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें।
कैसे बचें डिजिटल अरेस्ट से?
1. अनजान नंबर से आए वीडियो कॉल को रिसीव न करें।
2. डराने-धमकाने वाले कॉल पर तुरंत परिवार या पुलिस से बात करें।
3. किसी भी हालत में आरटीजीएस, यूपीआई से पैसा ट्रांसफर न करें।