Hospital Pharmacy Medicine Price: अस्पतालों में दवाओं के खेल का होगा पर्दाफाश, अब मरीज QR कोड से देख सकेंगे दवा की असली कीमत - Democracysamachar.com
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Hospital Pharmacy Medicine Price: अस्पतालों में दवाओं के खेल का होगा पर्दाफाश, अब मरीज QR कोड से देख सकेंगे दवा की असली कीमत

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📌 मुख्य बिंदु (Highlights)
  • Hospital Pharmacy Medicine Price: यूपी में अब अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं के दाम का खेल नहीं चलेगा। खाद्य सुरक...
  • PTR PTC Price: अस्पतालों के अंदर चल रही फार्मेसियों में दवाओं की मनमानी कीमतों पर अब लगाम लगने वाली है। अगर आप अस्पता...
  • खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने इसको लेकर एक बड़ी और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।...

Hospital Pharmacy Medicine Price: यूपी में अब अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं के दाम का खेल नहीं चलेगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने पूरी पारदर्शिता लाने के लिए नई व्यवस्था का आदेश दिया है।अब हर मरीज और उसके परिजन यह देख सकेंगे कि अस्पताल की फार्मेसी ने दवा कंपनी से दवा कितने में खरीदी है और उन्हें कितने में बेची जा रही है।यह जानकारी वेबसाइट के साथ-साथ QR कोड या ऐप के जरिए भी उपलब्ध करानी होगी।

PTR PTC Price: अस्पतालों के अंदर चल रही फार्मेसियों में दवाओं की मनमानी कीमतों पर अब लगाम लगने वाली है। अगर आप अस्पताल में भर्ती हैं और वहीं की फार्मेसी से दवा खरीद रहे हैं, तो जल्द ही आप अपने मोबाइल से ही पता लगा सकेंगे कि अस्पताल ने वह दवा कितने रुपये में खरीदी है और आपको कितने में बेची जा रही है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने इसको लेकर एक बड़ी और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। अब सभी अस्पताल फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट बनानी होगी और हर दवा की खरीद और बिक्री कीमत को ऑनलाइन दिखाना होगा। मरीज सिर्फ QR कोड स्कैन करके यह पूरा हिसाब-किताब देख सकेगा।

क्या है नई व्यवस्था?

FSDA के नए आदेश के मुताबिक, अस्पताल परिसर में या भर्ती मरीजों के लिए चलने वाली हर रिटेल फार्मेसी को एक पब्लिक वेबसाइट बनानी होगी। इस वेबसाइट पर कई जानकारियां देना अनिवार्य होगा –

1. दवा की पूरी डिटेल: दवा का नाम, ब्रांड नाम, जेनेरिक नाम, निर्माता कंपनी का नाम।

2. कीमत का खुलास: सबसे अहम – PTR और PTC। PTR मतलब Price to Retailer, यानी फार्मेसी ने कंपनी से दवा कितने में खरीदी। और PTC मतलब Price to Consumer, यानी मरीज को कितने में बेची जा रही है।

3. फार्मेसी का बायोडाटा: फार्मेसी का नाम, ड्रग लाइसेंस नंबर, लाइसेंस धारक का नाम, पूरे पते के साथ।

4. फार्मासिस्ट की जानकारी: वहां काम करने वाले फार्मासिस्ट का नाम, उसका रजिस्ट्रेशन नंबर और उसकी फोटो भी वेबसाइट पर लगानी होगी, ताकि फर्जी फार्मासिस्ट का खेल खत्म हो।

5. स्टॉक अपडेट: हर हफ्ते दवाओं के स्टॉक की जानकारी अपडेट करनी होगी।

6. QR कोड: इस वेबसाइट का लिंक और QR कोड फार्मेसी के काउंटर पर बड़ी जगह पर लगाना होगा, ताकि हर मरीज उसे आसानी से स्कैन कर सके।

यह नियम सिर्फ दवाओं पर ही नहीं, बल्कि मेडिकल डिवाइस जैसे स्टेंट, इम्प्लांट और न्यूट्रास्युटिकल्स (फूड सप्लीमेंट्स) पर भी लागू होगा।

क्यों पड़ी इस व्यवस्था की जरूरत? 67 गुना तक ज्यादा कीमत वसूली का खुलासा

यह सख्त कदम FSDA की एक चौंकाने वाली जांच के बाद उठाया गया है। विभाग ने प्रदेश के अस्पतालों की 214 फार्मेसियों से दवाओं की खरीद-बिक्री का डेटा मंगवाया। इसमें से 130 दवाओं का गहन विश्लेषण किया गया तो नतीजे हैरान करने वाले थे।

जांच में पाया गया कि 36 दवाओं की MRP, उनकी खरीद कीमत से 10 गुना से भी ज्यादा थी। कुछ मामलों में तो यह अंतर 67 गुना तक मिला।

सबसे बड़ा उदाहरण – पॉलिमिक्सिन-बी इंजेक्शन का है। यह एक गंभीर संक्रमण में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन है। इसकी अस्पताल की खरीद कीमत (PTR) सिर्फ 74.09 रुपये थी, लेकिन मरीजों से इसकी MRP 4,980.94 रुपये वसूली जा रही थी। यानी 74 रुपये की चीज 5 हजार में।

विभाग का कहना है कि कई निर्माता और मार्केटिंग कंपनियां अस्पतालों को MRP से काफी कम कीमत पर दवाएं दे देती हैं, लेकिन अस्पताल मरीजों को वही दवा पूरी MRP पर बेचते हैं। बीच का सारा मुनाफा अस्पताल रख लेता है और मरीज को इस छूट का कोई लाभ नहीं मिलता। इसी लूट को रोकने के लिए अब खरीद और बिक्री दोनों कीमतों को सार्वजनिक किया जा रहा है।

मरीजों को क्या फायदा होगा?

1. पारदर्शिता: मरीज को पता चलेगा कि वह जो दवा 5000 में खरीद रहा है, उसकी असली लागत कितनी है।

2. लूट पर रोक: जब कीमतें ऑनलाइन होंगी तो अस्पताल मनमानी MRP नहीं लगा पाएंगे।

3. सस्ती दवा का विकल्प: जेनेरिक नाम पता चलने से मरीज बाहर से सस्ती जेनेरिक दवा खरीदने का विकल्प चुन सकेगा।

4. फर्जी फार्मेसी पर रोक: लाइसेंस और फार्मासिस्ट की फोटो ऑनलाइन होने से फर्जी मेडिकल स्टोर बंद होंगे।

FSDA अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी जिलों के ड्रग इंस्पेक्टरों को निर्देश भेज दिए गए हैं। वेबसाइट न बनाने वाली फार्मेसियों का लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी।

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