Rudra Hospital Kanpur FIR : मरीज की मौत के बाद पथराव और बलवे में बढ़ सकती है कई अस्पताल संचालको की मुसीबत
- Rudra Hospital Kanpur FIR: कल्याणपुर में सड़क हादसे में घायल मरीज की मौत के बाद रुद्र हॉस्पिटल में हुए पथराव और बवाल ...
- घटना के बाद कार्यवाही करते हुए एसीएमओ रमित रस्तोगी, मृतक की फाइल फोटो
- Hospital Negligence Case: कल्याणपुर के रुद्र हास्पिटल में इलाज का दौरान मरीज की मौत के बाद तीमारदारों से मारपीट व पथर...
Rudra Hospital Kanpur FIR: कल्याणपुर में सड़क हादसे में घायल मरीज की मौत के बाद रुद्र हॉस्पिटल में हुए पथराव और बवाल में रिटायर्ड दरोगा समेत पांच लोग घायल हुए थे। पुलिस ने 5 नामजद और 30-35 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कर जांच शुरू की है। सीसीटीवी के आधार पर कई अस्पताल संचालकों की पहचान हो चुकी है, जिससे बवाल में शामिल लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

घटना के बाद कार्यवाही करते हुए एसीएमओ रमित रस्तोगी, मृतक की फाइल फोटो
Hospital Negligence Case: कल्याणपुर के रुद्र हास्पिटल में इलाज का दौरान मरीज की मौत के बाद तीमारदारों से मारपीट व पथराव करने में पांच नामजद समेत 30-35 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोपितों में रुद्र हास्पिटल संचालक नवनीत यादव और विपिन यादव भी शामिल हैं।
स्वजन को आरोप है कि इलाज में लापरवाही और पैसे लेने के बाद भी आपरेशन न कराने से मरीज की मौत हुई।जब उन्होंने इसके बावत बातचीत करनी चाही तो अस्पताल संचालक ने इलाज से संबंधित फाइल छीन ली और अपने साथियों को बुलाकर मारपीट करते हुए पथराव कर दिया।
जिसमें दिवंगत के दारोगा मौसा,उनके दो बेटे समेत परिवार के छह लोग घायल हो गए।फिलहाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
कानपुर देहात के शिवली थानाक्षेत्र के हरिकिशनपुर निवासी 25 वर्षीय प्रांशु की मंगलवार को मैथा के पास बाइक से जाते समय सड़क पर गाय से टक्कर हो गई थी।स्वजन ने हादसे में गंभीर रूप से घायल प्रांशु को कल्याणपुर के रुद्र हास्पिटल में भर्ती कराया।
स्वजन के मुताबिक अस्पताल संचालक विपिन यादव और नवनीत ने हालत ठीक बताकर उन्हें भ्रम में रखा। जोर देने पर गुरुवार को न्यूरो सर्जन डा. राजीव कैंथ को बुलाया गया।रविवार को हालत खराब बताकर एंबुलेंस से डाक्टर के पास भेजा गया जहां प्रांशु को डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया।स्वजन वापस अस्पताल पहुंचे और इलाज में लापरवाही को लेकर बातचीत की तो विवाद बढ़ गया।
आरोप है कि प्रवंधन ने इलाज से संबंधित फाइल ,दवाओं की पर्चियां छीनने का प्रयास किया।विरोध पर संचालक ने अपने 10 से 15 साथियों के साथ मिलकर जानलेवा हमला और महिलाओं के साथ अभद्रता करते हुए पथराव कर दिया।
जिसमें दिवंगत के दारोगा मौसा बलवान सिंह,अंकित उर्फ आशू ,अमित,सोंटी और मोंटी समेत छह लोग घायल हो गए। स्वजन की सूचना पर पहुंची पुलिस घायलों को सीएचसी ले गई जहां पर 3 संचालक ने 30 से 35 साथियों के साथ मिलकर समझौते का दबाव बनाया और गाली गलौज कर जान से मारने की धमकी दी।
घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है।वही सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस की निगरानी में शव शिवली स्थित गांव भेजा गया है।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि दिवंगत के चचेरे भाई धर्मेंद्र की तहरीर पर रुद्र हास्पिटल के।संचालक विपिन यादव,नवनीत,शिव हास्पिटल संचालक अतुल, अंशुल तिवारी, राजन दिवाकर और 35 अज्ञात लोगों के खिलाफ इलाज में लापरवाही,बलवा,मारपीट,वसूली के लिए मारपीट और धमकी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच कराई जा रही है।CCTV फुटेज और प्रचलित वीडियो की आधार पर अज्ञात आरोपितों की शिनाख्त कराई जा रही है।
अस्पताल पहुंची स्वास्थ्य विभाग टीम,लटका मिला ताला
नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी डा.रमित रस्तोगी ने बताया कि घटना के बाद वह रुद्र हास्पिटल के निरीक्षण के लिए गए थे।अस्पताल बंद मिला है। हालांकि उसका पंजीकरण वैध है।मरीज का क्या इलाज हुआ,कौन सी दवाएं इंजेशन दिए गए,किस स्तर पर लापरवाही हुई थी।इसकी जांच के लिए इलाज से जुड़े दस्तावेज और फाइल अस्पताल प्रबंधन से फोन के जरिए मांगी गई हैं।
व्हाट्सप संदेश पर जमा हुए थे संचालक के साथी
अस्पताल से जुड़े लोगों के मुताबिक वर्तमान में अस्पताल संचालकों का एक व्हाट्सप ग्रुप बना हुआ है।ग्रुप सदस्य के अस्पताल में जब भी किसी मरीज की मौत होती है तो संचालक उसी ग्रुप में संदेश डाल देता है जिसके कुछ ही मिनट के बाद अस्पताल के बाहर अस्पताल संचालकों और उनसे जुड़े लोगों भीड़ जमा हो जाती है।
अपने लोगों को पीछे देखकर अस्पताल संचालक मरीज के तीमारदारों के साथ अभद्रता कर देते हैं जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है।कमोबेश यही स्थिति रुद्र हास्पिटल में भी मरीज की मौत के बाद हुई थी।
छह लाख जमा कराकर भी नहीं कराया आपरेशन
स्वजन का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने छह दिन इलाज करने के दौरान 6.70 लाख रुपये लिए थे।इसमें आपरेशन के नाम पर छह लाख रुपये जमा कराये गए लेकिन आपरेशन नहीं कराया। इलाज में देरी और लापरवाही से प्रांशु की मौत हो गई।
चचेरे भाई धर्मेंद्र ने बताया कि प्रांशु की शादी चार वर्ष पहले ही हुई थी।परिवार में पिता अनिल,तीन बहनें शैंकी,पूजा ,दीपा,पत्नी निधि,बेटी शिब्बी है।पत्नी गर्भवती है जिसका एक दो दिन में ही प्रसव होना है।अब परिवार का क्या होगा।