डॉक्टरों ने महिला के पेट में तौलिया छोड़ा, 3 महीने तक दर्द से तड़पती रही, आयुष्मान कार्ड के बाद भी लिये पैसे
- कानपुर में डॉक्टरों ने महिला के पेट में तौलिया छोड़ा ,3 महीने तक दर्द से तड़पती रही, आयुष्मान कार्ड के बाद भी लिये पैसे
- *कानपुर।* कानपुर के कल्याणपुर से डॉक्टरों की लापरवाही का एक सनसनीखेज और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां ए...
- महिला तीन महीने तक पेट में असहनीय दर्द से तड़पती रही, जब दर्द के साथ ऑपरेशन वाली जगह से पस आने लगा तब दूसरे अस्पताल म...
Kanpur Medical Negligence: कानपुर में डॉक्टरों ने महिला के पेट में तौलिया छोड़ा ,3 महीने तक दर्द से तड़पती रही, आयुष्मान कार्ड के बाद भी लिये पैसे
*कानपुर।* कानपुर के कल्याणपुर से डॉक्टरों की लापरवाही का एक सनसनीखेज और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में सर्जिकल तौलिया छोड़ दिया गया और ऊपर से टांका लगा दिया गया।
महिला तीन महीने तक पेट में असहनीय दर्द से तड़पती रही, जब दर्द के साथ ऑपरेशन वाली जगह से पस आने लगा तब दूसरे अस्पताल में जांच में इस लापरवाही का खुलासा हुआ।
पीड़िता के पति ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल IGRS और कल्याणपुर थाने में शिकायत दर्ज कराकर दोनों अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला ?
मामला कानपुर देहात के मनेठू गांव का है। यहां के रहने वाले मजदूर वीरेंद्र कुमार की 24 वर्षीय पत्नी सोनी को करीब चार महीने पहले पेट में तेज दर्द हुआ था। परिजन उसे मकसूदाबाद स्थित ओमशांति हॉस्पिटल ले गए।
वहां जांच में बताया गया कि बच्चेदानी की ट्यूब फटने से पेट में खून जमा हो गया है और तुरंत ऑपरेशन करना पड़ेगा। पीड़ित का आरोप है कि अस्पताल संचालक अजय ने ऑपरेशन के लिए उसे कल्याणपुर स्थित विश्वास हॉस्पिटल भेज दिया। ऑपरेशन के बाद वापस ओमशांति हॉस्पिटल लाकर डिस्चार्ज कर दिया गया। इस ऑपरेशन के नाम पर पीड़ित से डेढ़ लाख रुपये वसूले गए।

तीन महीने बाद पेट से आने लगा पस
ऑपरेशन के करीब एक महीने बाद से सोनी को फिर से पेट में दर्द होने लगा। ऑपरेशन वाली जगह से लगातार पस निकलने लगा। परिजन उसे लेकर 11 अक्टूबर को अकबरपुर स्थित राफिल अस्पताल पहुंचे। 12 अक्टूबर को जब डॉक्टरों ने दोबारा जांच और ऑपरेशन किया तो सभी के होश उड़ गए।
पेट के अंदर एक पूरा सर्जिकल तौलिया फंसा हुआ था, जो सड़ने लगा था और उसी वजह से इंफेक्शन हो रहा था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर तौलिया को बाहर निकाला। फिलहाल महिला की हालत गंभीर बनी हुई है और वह अस्पताल में भर्ती है।

मरीज का आयुष्मान कार्ड
आयुष्मान कार्ड होने पर भी नहीं किया इलाज
पीड़ित वीरेंद्र ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उसने बताया कि ओमशांति हॉस्पिटल के बाहर आयुष्मान भारत योजना का बड़ा बोर्ड लगा था। उसने डॉक्टर से कहा कि उसका आयुष्मान कार्ड बना है, उसी से इलाज कर दिया जाए, लेकिन संचालक ने साफ मना कर दिया और कहा कि यहां आयुष्मान नहीं चलता।
सवाल उठ रहा है कि जब अस्पताल में आयुष्मान का विज्ञापन लगा है तो गरीब मरीज को उसका लाभ क्यों नहीं दिया गया? क्या ऐसे अस्पतालों को आयुष्मान की मान्यता दी जानी चाहिए?

मरीज के परिजन के द्वारा IGRS पोर्टल पर की गई शिकायत
विश्वास हॉस्पिटल ने झाड़ा पल्ला
इस मामले में जब विश्वास हॉस्पिटल के संचालक जगदीश चंद्र विश्वास से बात की गई तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सिर्फ अपना ऑपरेशन थिएटर (OT) 4000 रुपये किराए पर दिया था। उनका मरीज से कोई लेना-देना नहीं है। अजय अपने साथ सर्जन डॉक्टर, बेहोशी के डॉक्टर, ओटी असिस्टेंट और सारे उपकरण खुद लेकर आया था। ऑपरेशन किसने किया, इसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं है।
पुलिस क्या बोली ?
एसीपी कल्याणपुर दिलीप सिंह ने बताया कि पीड़ित की शिकायत मिली है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज हुई है। मामले की जांच कराई जा रही है, जांच रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी दोनों अस्पतालों की मान्यता और रिकॉर्ड की जांच करेगी।