CM Yogi Action: 5 दिन में 10 तहसीलदार सस्पेंड,13 को नोटिस,राजस्व अदालतों में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस
- CM Yogi Action:उत्तर प्रदेश में राजस्व वादों के निस्तारण में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई हुई है. 5 तहसीलदारों को तत्काल...
- CM Yogi Action: उत्तर प्रदेश में तहसीलों के सुस्त रवैये और राजस्व मामलों को लटकाने की आदत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्य...
- यह कार्रवाई सीएम योगी की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। इससे ठीक 5 दिन पहले एक सितंबर को भी सीएम ने दाखिल-खारिज, ...
CM Yogi Action:उत्तर प्रदेश में राजस्व वादों के निस्तारण में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई हुई है. 5 तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि 13 अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. यह कदम मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद उठाया गया है.

सीएम योगी की फ़ाइल फोटो
CM Yogi Action: उत्तर प्रदेश में तहसीलों के सुस्त रवैये और राजस्व मामलों को लटकाने की आदत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा प्रहार किया है। सीएम के निर्देश पर मंगलवार को एक बार फिर बड़ी कार्रवाई हुई है। राजस्व अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण में लापरवाही बरतने पर 5 तहसीलदारों को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी की गई है।
यह कार्रवाई सीएम योगी की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। इससे ठीक 5 दिन पहले एक सितंबर को भी सीएम ने दाखिल-खारिज, पैमाइश और वरासत जैसे मामलों को लटकाने पर 4 तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया था। यानी पिछले एक हफ्ते में कुल 10 अधिकारियों पर गाज गिरी है। सीएम के इस ताबड़तोड़ एक्शन से पूरे प्रदेश की तहसीलों में हड़कंप मचा हुआ है और अधिकारी फाइलों को निपटाने में जुट गए हैं।
7 सितंबर को हुई थी पूरे प्रदेश की समीक्षा
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह निलंबन की कार्रवाई 7 सितंबर को की गई गहन समीक्षा के बाद हुई है। उस दिन प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की तहसीलवार और अधिकारीवार समीक्षा की गई थी।
समीक्षा में पाया गया कि कई तहसीलों में दाखिल-खारिज के हजारों मामले महीनों से पेंडिंग पड़े हैं, जिससे किसानों और आम लोगों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई, जिसके बाद सीएम ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
मंगलवार को इन 5 अधिकारियों पर गिरी गाज
मंगलवार को जिन 5 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है, उनमें बड़े जिलों के तहसीलदार शामिल हैं:
1. अमित यादव – तहसीलदार संडीला, हरदोई
2. कृष्ण कुमार मिश्रा – तहसीलदार देवरिया
3. सौरभ कुमार – तहसीलदार जौनपुर
4. रंजन वर्मा – तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या, संप्रति तहसीलदार गाजीपुर
5. अलख शुक्ला – तहसीलदार प्रतापगढ़
इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने राजस्व अदालतों में पेंडिंग केसों के समयबद्ध निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाई और काम में घोर लापरवाही बरती।
29 अगस्त को सीएम ने दिया था अल्टीमेटम
यह पूरी कार्रवाई 29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री द्वारा की गई उच्चस्तरीय बैठक के बाद शुरू हुई है। उस बैठक में सीएम योगी ने राजस्व परिषद के अधिकारियों को दो टूक कहा था कि राजस्व वादों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर हर हाल में होना चाहिए।
सीएम ने कहा था कि दाखिल-खारिज, वरासत, पैमाइश जैसे मामले सीधे किसानों और आम आदमी से जुड़े हैं। इनमें देरी का मतलब है भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता मिली तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए।
13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
निलंबन के साथ ही 13 अन्य तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इन अधिकारियों को 7 दिन के अंदर जवाब देना होगा कि उनके यहां मामलों का निस्तारण क्यों नहीं हुआ। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इन पर भी निलंबन की तलवार लटक रही है।
नोटिस पाने वाले अधिकारियों में चंद्रशेखर वर्मा (तत्कालीन तहसीलदार देवरिया, संप्रति तहसीलदार गोरखपुर), गोपाल जी (नायब तहसीलदार कुशीनगर), रविरंजन कश्यप (जौनपुर), राकेश कुमार (बलरामपुर), कविता ठाकुर (गोंडा), देवानन्द तिवारी (फिरोजाबाद), स्नेहल वर्मा (लखनऊ), राहुल सिंह (अमेठी), अनिल कुमार (प्रतापगढ़), यजुवेन्द्र सिंह, सुखवीर सिंह, रमाशंकर मिश्रा और शार्द सिंह (लखनऊ) शामिल हैं।
सतत चलती रहेगी कार्रवाई: राजस्व परिषद
राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई कोई एक बार की खानापूर्ति नहीं है। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। परिषद अब हर हफ्ते राजस्व न्यायालयों के कामकाज की निगरानी करेगी और खराब प्रदर्शन वाले अधिकारियों की सूची सीएम कार्यालय को भेजेगी।
परिषद का कहना है कि इसका मकसद अधिकारियों को दंडित करना नहीं, बल्कि किसानों और आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय देना है। जिन तहसीलों में अच्छा काम होगा, उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।
सीएम के इस एक्शन के बाद से तहसीलों में अफसरों ने रात तक बैठकर फाइलें निपटानी शुरू कर दी हैं। आम लोगों में इस फैसले को लेकर खुशी है, क्योंकि अब उन्हें अपने छोटे-छोटे कामों के लिए महीनों तक चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।