लखनऊ में CM योगी की विद्यार्थियों को बड़ी सौगात, 50 हजार मेधावी बेटियों को मिलेगी फ्री स्कूटी,148 करोड़ पहुंचे 4.6 लाख छात्रों के खाते में.
- लखनऊ में CM योगी ने 50 हजार मेधावी बेटियों को फ्री स्कूटी देने की घोषणा की है, वहीं उनके द्वारा एक बटन क्लिक करते ही ...
- उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को लोक भवन में आयोजित छात्रव...
- मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि पैसे की कमी के कारण किसी भी छात्र की पढ़ाई न रुके। इसके लिए सरकार ह...
UP Free Scooty Scheme: लखनऊ में CM योगी ने 50 हजार मेधावी बेटियों को फ्री स्कूटी देने की घोषणा की है, वहीं उनके द्वारा एक बटन क्लिक करते ही 4.6 लाख छात्रों के खाते में 148 करोड़ रूपये की छात्रवृति सीधे स्थानांतरित की।
CM Yogi Scholarship News:उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को लोक भवन में आयोजित छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति वितरण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 4 लाख 60 हजार से ज्यादा छात्रों के खाते में 148 करोड़ रुपये की धनराशि एक क्लिक में ट्रांसफर की। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर जमकर हमला बोला और अगले महीने 50 हजार बेटियों को मुफ्त स्कूटर देने का बड़ा ऐलान भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि पैसे की कमी के कारण किसी भी छात्र की पढ़ाई न रुके। इसके लिए सरकार हर संभव मदद कर रही है।
किसे मिला लाभ?
समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कक्षा 9-10 और दशमोत्तर कक्षाओं के छात्रों को शामिल किया गया था।
– पिछड़ा वर्ग के 2,23,615 छात्र
– अनुसूचित जाति के 1,59,959 छात्र
– सामान्य वर्ग के 38,084 छात्र
– अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 छात्र
कुल 4,60,559 छात्रों को 148.04 करोड़ रुपये की राशि DBT के माध्यम से भेजी गई। मंच से 11 छात्रों को मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से प्रमाणपत्र भी दिया।
सपा सरकार पर हमला – 2016 में रोक दी थी छात्रवृत्ति
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी का नाम लिए बिना उस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2016 में तत्कालीन सरकार ने छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति तक रोक दी थी। छात्र दर-दर भटक रहे थे। 2017 में भाजपा की सरकार आने के बाद हमने न सिर्फ व्यवस्था को फिर से शुरू किया, बल्कि बकाया छात्रवृत्ति भी छात्रों तक पहुंचाई।
उन्होंने कहा कि पहले छात्रवृत्ति में बाबूगीरी और बिचौलिए हावी थे। फाइलें महीनों तक दफ्तरों में घूमती थीं और पैसा छात्रों तक पहुंचते-पहुंचते आधा रह जाता था। अब पूरी व्यवस्था ऑनलाइन है। आवेदन से लेकर भुगतान तक सब कुछ पारदर्शी है और पैसा सीधे छात्र के खाते में जा रहा है।
70 लाख छात्रों को छात्रवृत्ति का लक्ष्य, 4793 करोड़ बांटे
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 70 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने का लक्ष्य है। तकनीकी त्रुटियों के कारण जो करीब 4 लाख छात्र वंचित रह गए थे, उन्हें भी विशेष अभियान चलाकर जोड़ा गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि इस साल अब तक 65.95 लाख से अधिक विद्यार्थियों को 4793 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति दी जा चुकी है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
CM का छात्रों को संदेश – गुटका-चाट में मत उड़ाना पैसा
CM योगी ने अपने भाषण में छात्रों को सीख देते हुए और मजाकिया अंदाज में हँसते हुए कहा कि छात्रवृत्ति का पैसा मिलने के बाद उसे गुटका, पान और चाट-पकौड़ी खाने में मत उड़ा देना। इस पैसे से अच्छी-अच्छी किताबें खरीदो और अपना एक बुक बैंक बनाओ। यही किताबें तुम्हें जीवन में आगे बढ़ाएंगी।
50 हजार बेटियों को फ्री स्कूटी का तोहफा
कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण रहा फ्री स्कूटी योजना का ऐलान। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में वादा किया था कि मेधावी बेटियों को स्कूटर दिया जाएगा। उस वादे को पूरा करते हुए सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण करने वाली शीर्ष 50 हजार छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत मुफ्त पेट्रोल चालित स्कूटर देने का फैसला किया है। अगले महीने से इन स्कूटरों का वितरण शुरू हो जाएगा।
बेसिक शिक्षा में क्रांतिकारी सुधार
योगी ने कहा कि 2017 से पहले बेसिक शिक्षा की हालत खस्ता थी, ड्रॉपआउट दर 19 से 20 प्रतिशत थी। बच्चे स्कूल छोड़ देते थे। आज हमने 1.60 करोड़ बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, किताब, जूते-मोजे और स्वेटर के लिए सीधे उनके माता-पिता के खाते में पैसे दिए हैं।
अटल आवासीय विद्यालयों में 18 हजार श्रमिक और निराश्रित बच्चों को फ्री में पढ़ाया जा रहा है। 746 विकासखंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को अपग्रेड किया गया है और 2300 से अधिक स्कूलों में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत स्मार्ट क्लास, लैब और अन्य सुविधाएं दी गई हैं।
CM ने सुनाई मंत्री राजभर और असीम अरुण की कहानी
मुख्यमंत्री ने मंच पर मौजूद अपने दो मंत्रियों के जीवन संघर्ष को भी छात्रों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि मंत्री ओम प्रकाश राजभर को समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिली तो उनकी पढ़ाई छूट गई थी । परिवार चलाने के लिए उन्हें ऑटो और टैक्सी तक चलानी पड़ी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, संघर्ष किया और आज जनता की आवाज बनकर मंत्री बने हैं। अगर उन्हें समय पर छात्रवृत्ति मिल गई होती तो शायद वो भी पढ़-लिखकर कहीं नौकरी कर रहे होते और नेता नहीं बनते।
वहीं असीम अरुण को पढ़ाई का मौका मिला तो वो IPS अधिकारी बने, ADG रैंक तक पहुंचे, कानपुर के पुलिस कमिश्नर रहे और फिर नौकरी छोड़कर राजनीति में आए। दोनों के रास्ते अलग थे, लेकिन मंजिल एक है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से किया गया प्रयास जरूर रंग लाता है।
इस मौके पर मंत्री ओम प्रकाश राजभर, असीम अरुण, संजीव गोंड, दानिश आजाद अंसारी, नरेंद्र कश्यप सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।