दिल्ली से कानपुर तक नकली रेबीज वैक्सीन का जानलेवा जाल, 590 नकली वायल से हुआ खुलासा,2 फार्मा फर्म सील

- दिल्ली में नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन मामले की जांच का कनेक्शन अब कानपुर से जुड़ गया है। दिल्ली के भागीरथ पैलेस में छापे...
- देश भर में जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर चल रहे काले कारोबार का एक और खतरनाक चेहरा सामने आया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ल...
- इस मामले में दिल्ली पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद कानपुर औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिरहान...
Fake Abhayrab Vaccine Racket: दिल्ली में नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन मामले की जांच का कनेक्शन अब कानपुर से जुड़ गया है। दिल्ली के भागीरथ पैलेस में छापेमारी के दौरान 481 संदिग्ध वैक्सीन की शीशियां बरामद हुई थीं, जिनकी सप्लाई कानपुर की एक एजेंसी से होने का पता चला। इसके बाद यूपी ड्रग विभाग की टीम ने कानपुर में दो ठिकानों पर छापेमारी की है।
Fake Abhayrab Vaccine Racket: देश भर में जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर चल रहे काले कारोबार का एक और खतरनाक चेहरा सामने आया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक और मुखर्जी नगर से शुरू हुई जांच अब उत्तर प्रदेश के कानपुर तक पहुंच गई है। नामी कंपनी की एंटी-रेबीज वैक्सीन ‘अभयराब’ के असली बैच नंबर का इस्तेमाल कर नकली वैक्सीन बेचने के बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है।
इस मामले में दिल्ली पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद कानपुर औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिरहाना रोड, नौघड़ा स्थित न्यू आरजे एजेंसी की दो फर्मों को सील कर दिया है।
दिल्ली में कैसे हुआ खुलासा
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ड्रग्स कंट्रोल विभाग और दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को लंबे समय से चांदनी चौक के भगीरथ पैलेस इलाके में नकली दवाओं की सप्लाई की सूचना मिल रही थी। इसी इनपुट पर 22 अप्रैल 2026 को मुखर्जी नगर के एक अनधिकृत आवासीय परिसर में छापेमारी की गई।
यहां से भारी मात्रा में अभयराब एंटी-रेबीज वैक्सीन बरामद की गई। इन वायल पर निर्माता कंपनी ह्यूमन बायोलॉजिक्स इंस्टीट्यूट का नाम और बैच नंबर KE25012 दर्ज था। मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया।
बरामद वैक्सीन के नमूने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के अधिकारियों की मौजूदगी में लिए गए और जांच के लिए केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (CDL) कसौली भेजा गया।
लैब रिपोर्ट ने उड़ाए होश
CDL कसौली की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बरामद वैक्सीन मानक गुणवत्ता पर खरी नहीं उतरी। लैब ने इसे ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ और गलत ब्रांडिंग वाला उत्पाद करार दिया। यानी असली कंपनी के नाम और बैच नंबर का इस्तेमाल कर नकली वैक्सीन तैयार की जा रही थी।
इसके बाद CDSCO ने देश के सभी राज्यों के ड्रग्स कंट्रोल अधिकारियों को बैच नंबर KE25012 की बिक्री और वितरण पर कड़ी निगरानी रखने का अलर्ट जारी किया।
कंपनी ने 17 अंतर गिनाए
वैक्सीन बनाने वाली असली कंपनी ह्यूमन बायोलॉजिक्स इंस्टीट्यूट ने 4 सितंबर को CDSCO और DCGI को दिए जवाब में साफ कहा कि बरामद वैक्सीन उसकी बनाई हुई नहीं है। कंपनी ने अपनी असली वैक्सीन और नकली वैक्सीन की तुलना में 17 बड़े अंतर बताए हैं – जैसे लेबलिंग, प्रिंटिंग, वायल की गुणवत्ता और पैकेजिंग में फर्क।
कंपनी ने बताया कि असली बैच KE25012 को बाजार में भेजने से पहले 7 नवंबर 2025 को CDL कसौली से बैच रिलीज सर्टिफिकेट लिया गया था। इसके बाद इस बैच की कुल 83,370 वायल अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर चैनल के माध्यम से देश भर में भेजी गई थीं। कंपनी ने 14 अगस्त को उत्पादन और वितरण के सारे रिकॉर्ड भी CDSCO को सौंप दिए हैं।
तार जुड़े कानपुर के नौघड़ा से
दिल्ली में पकड़ी गई नकली वैक्सीन की सप्लाई चेन की जांच जब आगे बढ़ी तो उसके तार कानपुर से जुड़े। दिल्ली औषधि विभाग ने कानपुर औषधि विभाग को इनपुट दिया कि इस नकली वैक्सीन की सप्लाई कानपुर के बिरहाना रोड, नौघड़ा स्थित न्यू आरजे एजेंसी की दो फर्मों से की जा रही है।
इस सूचना पर औषधि निरीक्षक देवयानी दुबे और ओमपाल की टीम ने दो दिन तक फर्म की जानकारी जुटाई और बुधवार को छापेमारी की।
औषधि निरीक्षक देवयानी दुबे ने बताया, “दिल्ली से मिले इनपुट पर हमने कार्रवाई की। मौके पर नकली वैक्सीन का स्टॉक तो नहीं मिला, लेकिन क्रय-विक्रय के अभिलेख मिले हैं। जिसके आधार पर न्यू आरजे की दोनों एजेंसियों को सील कर दिया गया है।”
जांच में अभी तक 590 वायल नकली वैक्सीन के क्रय-विक्रय के प्रमाण मिले हैं। विभाग ने अभयराब वैक्सीन के इस बैच की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है। फर्म के संचालक को नोटिस देकर पूछा गया है कि उसने यह नकली वैक्सीन कहां से खरीदी और किन-किन राज्यों में बेची।
एक दर्जन फर्में रडार पर
औषधि विभाग का कहना है कि यह सिर्फ एक फर्म का मामला नहीं है। न्यू आरजे एजेंसी के अभिलेखों में शहर की एक दर्जन से ज्यादा फर्मों के नाम सामने आए हैं, जिनका कई महीनों से इस फर्म के साथ लेन-देन चल रहा था। अब विभाग उन सभी फर्मों पर छापेमारी की तैयारी कर रहा है।
कानपुर में पहले भी पकड़ा गया है नकली दवा का जखीरा
कानपुर में नकली और नशीली दवाओं का कारोबार नया नहीं है।
– बिरहाना रोड की नील वाली गली में श्री लक्ष्मी फार्मा में घर में ही एंटीबायोटिक, DSR दवा, इंजेक्शन बनाने और पैक करने का मामला पकड़ा गया था, जहां से 5 लाख की दवा जब्त हुई थी।
– अनवरगंज की एक फर्म में बिना बिल के कफ सिरप और नींद की गोलियां मिली थीं।
– बिरहाना रोड के केएन फार्मा में गुजरात की कंपनी की नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं का बड़ा भंडारण मिला था।
– नवंबर में कलेक्टरगंज और बिरहाना रोड से करीब 2 लाख से ज्यादा कोडीन युक्त सिरप की शीशियां बरामद हुई थीं, जिसमें 47 फर्मों के फर्जी बिल मिले थे।
क्यों खतरनाक है नकली रेबीज वैक्सीन
डॉक्टरों के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन जीवन रक्षक है। कुत्ते के काटने के बाद अगर असली वैक्सीन न लगे तो रेबीज से मौत तय है। नकली वैक्सीन लगने से मरीज को यह भ्रम रहेगा कि उसका इलाज हो गया, जबकि वायरस शरीर में फैलता रहेगा। इसलिए यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर हत्या जैसा अपराध है।
फिलहाल औषधि विभाग और पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक जाने की कोशिश कर रही है कि नकली वैक्सीन कहां बन रही थी और इसका नेटवर्क कितने राज्यों में फैला है।