Kanpur Ayushman Yojana Fraud : कानपुर के दो अस्पतालों पर 1.25 लाख वसूलने का आरोप, कर्मचारी बोला- प्रधानमंत्री से इलाज करा लो - Democracy Samachar
Uncategorized ⏱️ 2 मिनट पढ़ाई

कानपुर के दो अस्पतालों पर 1.25 लाख वसूलने का आरोप, कर्मचारी बोला- प्रधानमंत्री से इलाज करा लो

Author
democracysamachar@gmail.com ✔
📌 मुख्य बिंदु (Highlights)
  • मरीज ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर की शिकायत, आयुष्मान भारत योजना के लाभ से वंचित रहने का विश्वास हॉस्पिटल और न्य...
  • पीड़ित ने जब एक अस्पताल में अपने आयुष्मान कार्ड होने का हवाला दिया तो अस्पताल के डॉक्टर ने  कहा कि यहां तुम्हारे आयुष...
  • खबर से संबंधित प्रकार प्रतीकात्मक फोटो 

Kanpur Ayushman Yojana Fraud : मरीज ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर की शिकायत, आयुष्मान भारत योजना के लाभ से वंचित रहने का विश्वास हॉस्पिटल और न्यू लखनपुर हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप लगाया है, उसके अनुसार आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी उससे 1.25 लाख रुपये वसूलने गये हैं ।

पीड़ित ने जब एक अस्पताल में अपने आयुष्मान कार्ड होने का हवाला दिया तो अस्पताल के डॉक्टर ने  कहा कि यहां तुम्हारे आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं हो पाएगा ज्यादा है तो प्रधानमंत्री से इलाज कराओ।

खबर से संबंधित प्रकार प्रतीकात्मक फोटो 

Ayushman Card Vasuli : उत्तर प्रदेश के कानपुर में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। एक मजदूर ने शहर के दो निजी अस्पतालों पर आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद इलाज के नाम पर करीब 1.25 लाख रुपये वसूलने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि पहले अस्पताल में उससे पैसे लेने के बाद बाहर कर दिया गया, जबकि दूसरे अस्पताल में भी आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिला। मामले में पीड़ित ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत के अनुसार, चौबेपुर क्षेत्र के निगोहा प्रतापपुर निवासी शशिकांत मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। 23 सितंबर को पेट में दर्द, सूजन और सांस लेने में परेशानी होने पर परिजन उसे कल्याणपुर स्थित विश्वास हॉस्पिटल एवं सर्जिकल सेंटर लेकर पहुंचे। परिवार को उम्मीद थी कि आयुष्मान कार्ड से इलाज का खर्च नहीं देना पड़ेगा।

पीड़ित मरीज और विवादित विश्वास हॉस्पिटल का प्रतीकात्मक फोटो

विश्वास हॉस्पिटल पर 11 हजार रुपये लेने का आरोप

शशिकांत का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती करने के बाद उसका सीटी स्कैन ( CT SCAN ) कराया गया, जिसके लिए पांच हजार रुपये लिए गए। इसके बाद अतिरिक्त रकम मांगी गई। मरीज ने आयुष्मान कार्ड होने की बात कही तो कथित तौर पर उससे पैसे देकर इलाज कराने को कहा गया।

पीड़ित के मुताबिक, भुगतान को लेकर विवाद होने के बाद उससे छह हजार रुपये और लिए गए तथा उसे अस्पताल से बाहर कर दिया गया। इस तरह पहले अस्पताल में कुल 11 हजार रुपये वसूले जाने का आरोप है।

न्यू लखनपुर हॉस्पिटल और पीड़ित मरीज का आयुष्मान कार्ड, प्रार्थना पत्र के साथ प्रतीकात्मक फोटो

दूसरे अस्पताल में भी लाखों के करीब खर्च

पहले अस्पताल से निकलने के बाद परिवार शशिकांत को गुरुदेव चौराहे के पास स्थित न्यू लखनपुर हॉस्पिटल लेकर पहुंचा। शिकायतकर्ता का कहना है कि यहां शुरुआत में आयुष्मान योजना के तहत इलाज का भरोसा दिया गया और उसे भर्ती कर लिया गया, लेकिन बाद में विभिन्न मदों में पैसे मांगे जाने लगे।

शशिकांत ने आरोप लगाया कि आयुष्मान कार्ड की बात करने पर अस्पताल के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर कहा कि इलाज कराना है तो पैसे देने होंगे। शिकायत में कर्मचारी के अभद्र व्यवहार का भी उल्लेख किया गया है।

परिवार के अनुसार, 24 सितंबर से 29 सितंबर तक अस्पताल खर्च, दवा का खर्च और खून जांच  आदि के नाम पर एक लाख 14 हजार (1,14000/-) रुपये से अधिक खर्च हुए। मरीज की हालत को देखते हुए परिजनों ने कर्ज लेकर रकम जुटाई।

आयुष्मान भारत योजना और पीड़ित मरीज का प्रतीकात्मक फोटो

योजना के लाभ पर उठे सवाल

पीड़ित के दावे के मुताबिक, दोनों अस्पतालों में मिलाकर लगभग 1.25 लाख रुपये खर्च हुए। परिवार का सवाल है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उसे सरकारी स्वास्थ्य योजना का लाभ क्यों नहीं मिल पाया।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को निर्धारित नियमों और सूचीबद्ध अस्पतालों में सालाना पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है। हालांकि, इलाज का लाभ अस्पताल की सूचीबद्ध स्थिति, बीमारी और संबंधित पैकेज की पात्रता पर निर्भर करता है।

ऐसे में यह जांच जरूरी है कि दोनों अस्पताल योजना के तहत सूचीबद्ध थे या नहीं और मरीज के उपचार पर लागू नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

जांच और कार्रवाई की मांग

इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारियों को अस्पतालों के बिल, जांच रिपोर्ट, भर्ती संबंधी दस्तावेज और आयुष्मान कार्ड के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए।

फिलहाल, अस्पतालों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अस्पतालों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि योजना के नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।

पीड़ित परिवार को अब शिकायत पर कार्रवाई का इंतजार है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करना जरूरी होगा, ताकि जरूरतमंद मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।

यह भी पढ़े…..

खबर शेयर करें:
ताज़ा खबरों के लिए हमारे ग्रुप से जुड़ें