कानपुर पुलिस का बड़ा एक्शन, होटल के कमरे से 250 करोड़ की साइबर ठगी का खेल, फर्जी फर्म-म्युल अकाउंट वाले गरीब से दिखने बाले 4 जालसाज गिरफ्तार
- कानपुर पुलिस का बड़ा एक्शन,250 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड मामले में कानपुर से चार आरोपियों को दबोचा है। जांच में सामन...
- प्रेस कांफ्रेंस के दौरान साइबर फ्रॉड करने वाले आरोपी और उनके पास से बरामद किए गए सबूत
- कानपुर कमिश्नरेट पुलिस को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पश्चिम जोन की साइबर क्राइम सेल और रावतपुर ...
Kanpur Cyber Fraud 250 Crore: कानपुर पुलिस का बड़ा एक्शन,250 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड मामले में कानपुर से चार आरोपियों को दबोचा है। जांच में सामने आया कि ये जालसाज फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए बैंक में म्युल अकाउंट खुलवाते थे, और फिर ठगी से हासिल रकम को अपनी फर्जी फर्मों के खातों में घुमाते थे।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान साइबर फ्रॉड करने वाले आरोपी और उनके पास से बरामद किए गए सबूत
Kanpur Cyber Fraud 250 Crore: कानपुर कमिश्नरेट पुलिस को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पश्चिम जोन की साइबर क्राइम सेल और रावतपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने फर्जी फर्मों और म्युल बैंक खातों के जरिए पूरे देश में 250 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है।
पुलिस ने 24 सितंबर को आईआईटी कानपुर के पिछले गेट के पास छापेमारी कर गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी होटलों में बैठकर APK फाइलों के जरिए ऑनलाइन गेमिंग और साइबर फ्रॉड के पैसे को इधर-उधर कर रहे थे। पुलिस ने उनके पास से 6 मोबाइल फोन बरामद किए हैं और सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
एक खाते से खुला 250 करोड़ का राज
इस पूरे रैकेट का खुलासा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की मॉनिटरिंग के दौरान हुआ।
पुलिस उपायुक्त पश्चिम एस.एम. कासिम आबिदी ने बताया कि NCRP पोर्टल पर ‘ऑर्बिट बिल्डइन्फ्रा’ नाम की एक फर्म के करंट अकाउंट पर पुलिस की नजर पड़ी। इस अकेले खाते के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों से 116 शिकायतें दर्ज थीं और करीब 8 करोड़ रुपये का फ्रॉड ट्रांजैक्शन हुआ था।
जब पुलिस ने इस खाते के डायरेक्टर विपिन कुमार और शिवप्रताप को उठाकर पूछताछ की तो पूरा नेटवर्क सामने आ गया। पूछताछ में पता चला कि औरैया के रहने वाले राजशेखर ने इनकी मुलाकात कानपुर देहात के रनिया निवासी हिमांशु गौतम से कराई थी। इन चारों ने मिलकर फर्जी दस्तावेजों से फर्म बनाई और फिर बैंक में म्युल अकाउंट खोला।
जांच आगे बढ़ी तो ऐसे ही 5 मुख्य म्युल करंट खातों का पता चला, जिनमें सीधे तौर पर 16.3 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ था। लेकिन जब इन 5 खातों को NCRP पोर्टल पर चेक किया गया तो होश उड़ गए। इन खातों के खिलाफ देश भर से कुल 322 शिकायतें दर्ज थीं, जिनकी कुल ठगी की रकम लगभग 250 करोड़ रुपये आंकी गई है।
होटल में बैठकर चलता था APK फाइल का खेल
गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। डीसीपी पश्चिम के अनुसार आरोपी सबसे पहले फर्जी आधार, पैन और अन्य दस्तावेजों से फर्जी फर्म रजिस्टर कराते थे। इसके बाद SBI, Axis Bank, Jana Small Finance Bank, Bank of India और Canara Bank जैसी बैंकों की स्थानीय शाखाओं में करंट अकाउंट खुलवाते थे। इन्हें ही म्युल अकाउंट कहा जाता है।
खाता खुलने के बाद ये आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए लगातार शहर के अलग-अलग होटलों में ठहरते थे। होटल के कमरे से ही ये APK फाइलों के जरिए ऑनलाइन गेमिंग, टास्क फ्रॉड और अन्य साइबर ठगी का पैसा इन म्युल खातों में मंगवाते थे और फिर आगे क्रिप्टो या अन्य माध्यमों से उसे सफेद कर देते थे।
बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध
इतने बड़े पैमाने पर संदिग्ध लेन-देन के बावजूद संबंधित बैंकों ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया और न ही पुलिस को सूचना दी। एक ही खाते में देश के कोने-कोने से करोड़ों रुपये आ रहे थे और तुरंत निकाले जा रहे थे, लेकिन बैंक की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए पुलिस ने अब इसमें संबंधित बैंक कर्मियों की भूमिका को भी संदिग्ध माना है। इस एंगल पर भी गहराई से जांच की जा रही है।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी ?
पकड़े गए चारों आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
1. विपिन कुमार (28 वर्ष) – निवासी मडैया जय सिंह, औरैया
2. शिवप्रताप (25 वर्ष) – निवासी करपूरीया, औरैया
3. राजशेखर उर्फ अजीत (28 वर्ष) – निवासी डहरियापुर, औरैया
4. हिमांशु गौतम (21 वर्ष) – निवासी किशरबल, रनियां, कानपुर देहात
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान घटना के संबंध में पुलिस उपायुक्त पश्चिम एस एम क़ासिम अबिदी द्वारा दी गई बाइट
पुलिस ने थाना रावतपुर में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सभी को जेल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह काफी बड़ा है और इसके अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े और भी म्युल खातों का पता चल सकता है।