अरबों रूपये के साइबर फ़्रॉड का हुआ भंडाफोड़,दुबई से लौटते ही हैदराबाद में धरा गया मास्टरमाइंड, 65 लाख कैश बरामद,दरोगा का बेटा भाग नेपाल

- कानपुर की साइबर क्राइम पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। निवेश के नाम पर फर्जी कंपनियां और बैंक खाते बनाकर करोड़ों-अरबों...
- कमिश्नरेट पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने ऑनलाइन गेमिंग, हवाला और इनवेस्टमेंट फ्रॉड के नाम पर 5600 करोड़ रुपये की ठगी कर...
- पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने शनिवार को पुलिस लाइन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे साइबर फ्रॉड का खुलासा किया। उन्होंने...
Kanpur Cyber Fraud 5600 Crore:कानपुर की साइबर क्राइम पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। निवेश के नाम पर फर्जी कंपनियां और बैंक खाते बनाकर करोड़ों-अरबों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने बरामद किया 65 लख रुपए
Kanpur Cyber Fraud 5600 Crore: कमिश्नरेट पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने ऑनलाइन गेमिंग, हवाला और इनवेस्टमेंट फ्रॉड के नाम पर 5600 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस बड़े नेटवर्क के दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान बेकनगंज निवासी शाहजेव वारिस और चमनगंज निवासी सलमान के रूप में हुई है। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर जाजमऊ स्थित एक फर्म में छापेमारी कर 65 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने शनिवार को पुलिस लाइन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे साइबर फ्रॉड का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह गिरोह पिछले तीन सालों से 76 फर्जी कंपनियां बनाकर देशभर में ठगी कर रहा था। इन कंपनियों के खिलाफ NCRP पोर्टल पर यूपी समेत कई राज्यों में 86 से ज्यादा फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हैं।
पुलिस आयुक्त परिषद और आरोपियों की पेशी
Kanpur Cyber Fraud 5600 Crore: फर्जी 76 कंपनियां, 5600 करोड़ का ट्रांजेक्शन और विदेशों तक फैला नेटवर्क
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पकड़े गए आरोपी बेहद शातिर हैं। ये लोग फर्जी फर्म बनाकर ऑनलाइन गेमिंग ऐप, हवाला ट्रांजेक्शन और इनवेस्टमेंट में मोटा मुनाफा दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करते थे। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने 45 लोगों के नाम पर 76 बैंक अकाउंट खुलवाए थे। इन अकाउंट्स में पिछले तीन सालों में 5600 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।
सबसे ज्यादा लेनदेन ICICI और HDFC बैंक के खातों में हुआ है, जिसमें अकेले 3000 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन मिला है। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा, बंधन बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक में भी इनके खाते मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक, 16 बैंक अकाउंट सीधे ऑनलाइन गेमिंग ऐप से जुड़े हुए हैं, जिनमें 1037 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया है।
प्रेस कांफ्रेंस में पेशी के दौरान आते हुए आरोपी
11 फर्मों का मालिक निकला शाहजेव, 170 करोड़ का हिसाब, सलमान के खाते में 16 करोड़
पुलिस जांच में आरोपी शाहजेव वारिस की 11 फर्जी फर्में मिली हैं। इन फर्मों के खातों में पिछले दो सालों में 170 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। वहीं दूसरे आरोपी सलमान की दो फर्में मिली हैं, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग के जरिए 16 करोड़ रुपये आए थे। इसमें से यस बैंक के खाते में 10.99 करोड़ और कोटक बैंक के खाते में 5.91 करोड़ रुपये आए थे।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह के दो अन्य साथी जाजमऊ दरगाह शरीफ निवासी चांद सिद्दीकी और बेकनगंज खान मार्केट निवासी मो. अमान पहले से ही ठगी के एक मामले में जेल में बंद हैं। चांद सिद्दीकी ने अकेले दो साल में 33.82 करोड़ रुपये की ठगी की थी।
इसी मामले में 18 और 19 अगस्त को शाहजेव और सलमान के खिलाफ साइबर थाने में दो अलग-अलग FIR दर्ज की गई थीं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपियों की पेशी के दौरान पुलिस आयुक्त द्वारा दी जा रही जानकारी
FIR के बाद दुबई भागा था आरोपी, लुक आउट नोटिस पर हैदराबाद में दबोचा
पुलिस की जांच में आरोपियों की ट्रैवल हिस्ट्री भी सामने आई है। दोनों आरोपी दुबई, तुर्की, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों की कई बार ट्रिप कर चुके हैं।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 18 अगस्त को जब पहला मुकदमा दर्ज हुआ तो आरोपी शाहजेव वारिस दुबई में था। वह 21 अगस्त को भारत लौटा, लेकिन उसे FIR की जानकारी मिली तो वह दोबारा दुबई भाग गया। पुलिस ने उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया था।
पुलिस से बचने के लिए शातिर आरोपी दुबई से सीधी फ्लाइट न लेकर हैदराबाद की फ्लाइट से भारत आया, लेकिन इमिग्रेशन पर ही उसे डिटेन कर लिया गया। सूचना मिलते ही कानपुर साइबर क्राइम की टीम हैदराबाद पहुंची और वहां की कोर्ट में पेश कर 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर उसे कानपुर लेकर आई। सलमान को भी कानपुर से ही गिरफ्तार किया गया।
जाजमऊ की HMS कंपनी में छापा, 65 लाख कैश जब्त, दरोगा का बेटा निकला साथी
गिरफ्तार आरोपी शाहजेव की निशानदेही पर पुलिस ने जाजमऊ स्थित फूड एग्रो का काम करने वाली HMS नाम की कंपनी में छापेमारी की। वहां से पुलिस को 65 लाख रुपये कैश मिला। मौके पर कैश का कोई लेखा-जोखा नहीं मिला, जिसके बाद पुलिस ने पूरी रकम जब्त कर ट्रेजरी में जमा करा दी है।
पूछताछ में आरोपियों ने अपने नेटवर्क के अन्य साथियों के नाम भी उगले हैं। इसमें चकेरी निवासी एक दरोगा का बेटा इखलाक हुसैन, मो. आरिफ, इतिशाम हुसैन, शाहवेज इलाही, मो. मुजम्मिल और इखलाख हुसैन शामिल हैं। पुलिस इन सभी की तलाश में जुटी है।
पुलिस को इखलाक हुसैन की लोकेशन लखनऊ के लुलु मॉल में मिली थी, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले वह वहां से भाग निकला। उसकी आखिरी लोकेशन नेपाल में ट्रेस हुई है। वहीं आरोपी मो. आरिफ की लोकेशन मुंबई में मिली है। पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
घटना के संबंध में पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल के द्वारा दी गई बाईट
इन नामों से बनाई थीं फर्जी कंपनियां
आरोपियों ने एग्रीकॉम, सिद्धनाथ इंटरप्राइजेज, रॉयल इंटरप्राइजेज, इंगोठा, एमए ट्रेडर्स, एसएस इंटरप्राइजेज, एआई एग्रो, परफेक्ट ट्रेडर्स, एसआर इंटरप्राइजेज, एसजी ट्रेडर्स, एमएस रॉयल इंटरप्राइजेज जैसी 76 फर्जी फर्में बनाई थीं। इनके नाम पर ही बैंक खाते खोले गए थे और पूरा 5600 करोड़ का खेल इन्हीं खातों से खेला जा रहा था।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि इस गिरोह के तार दुबई तक जुड़े हैं और हवाला के जरिए पैसा विदेश भेजा जाता था। पुलिस अब इनके बैंक खातों को फ्रीज करने और ED को भी इस मामले की जानकारी देने की तैयारी में है। जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी की जाएगी।