Kanpur News: हिरनी गांव में कच्ची छत के नीचे दब गया एक हंसता-खेलता परिवार: पिता और तीन मासूमों की एक साथ उठी अर्थियों ने रुला दिया पूरा क्षेत्र
- Kanpur News : उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के घाटमपुर तहसील के सांढ थाना क्षेत्र के हिरनी गांव में सोमवार की सुबह कुछ ...
- Kanpur Ghatampur News : रविवार की दोपहर कुदरत का कैसे बरपा कयामत का कहर,
- बताया जा रहा है कि हिरनी गांव के रहने वाले दारा सिंह के बेटे मुकेश अपने परिवार के साथ अपने पैतृक कच्चे मकान में रहते ...
Kanpur News: साढ़ थाना क्षेत्र के हिरनी गांव में सोमवार की सुबह चीखों और सिसकियों के साथ हुई। दो मंजिला कच्चा मकान गिरने से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत ने पूरे गांव को हिला कर रख दिया है। रविवार रात पोस्टमार्टम के बाद जब आधी रात को एंबुलेंस से चारों शव गांव लाए गए, तो मंजर देख हर किसी की रूह कांप गई, गांव में कोहराम मच गया और मातम के बीच प्रशासन के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
हिरनी गांव में एक साथ उठीं 4 अर्थियां
Kanpur News : उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के घाटमपुर तहसील के सांढ थाना क्षेत्र के हिरनी गांव में सोमवार की सुबह कुछ ऐसी आई कि जिसने भी देखा उसकी आंखें नम हो गईं और रूह कांप गई। एक ही आंगन से एक साथ चार अर्थियां उठना, एक ही परिवार के चार सदस्यों का एक साथ श्मशान घाट जाना, यह दृश्य किसी भी दिल को दहला देने के लिए काफी था। रविवार की दोपहर जो कच्चा मकान भरभराकर गिरा, उसने 45 वर्षीय पिता मुकेश और उनकी तीन फूल सी बेटियों की जिंदगियां हमेशा के लिए छीन लीं। सोमवार को जब यमुना के मूसानगर घाट पर पिता और तीनों बेटियों को एक साथ मुखाग्नि दी गई तो वहां मौजूद हर शख्स फफक-फफक कर रो पड़ा। गांव में सन्नाटा है, चूल्हे नहीं जले हैं और हर जुबां पर बस एक ही बात है कि कच्चे मकान ने एक पूरे परिवार को उजाड़ दिया।
घटना के समय का वीडियो
Kanpur Ghatampur News : रविवार की दोपहर कुदरत का कैसे बरपा कयामत का कहर,
बताया जा रहा है कि हिरनी गांव के रहने वाले दारा सिंह के बेटे मुकेश अपने परिवार के साथ अपने पैतृक कच्चे मकान में रहते थे। यह मकान कई दशकों पुराना था, मिट्टी और खपरैल से बना हुआ। पिछले कुछ दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश के कारण मकान की मिट्टी की दीवारें और छत कमजोर हो गई थीं। रविवार दोपहर को परिवार घर के अंदर था। मुकेश, उनकी चार बेटियां घर में मौजूद थीं। अचानक बिना किसी आहट के मकान की छत और दीवार भरभराकर गिर पड़ी।
मलबे के नीचे पूरा परिवार दब गया। चीख-पुकार सुनकर आस-पास के ग्रामीण दौड़े। ग्रामीणों ने अपने हाथों से मिट्टी हटाना शुरू किया, पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। काफी मशक्कत के बाद मलबे से सभी को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पिता मुकेश, 16 साल की माया, 12 साल की नीतू और 7 साल की पल्लवी ने मलबे में ही दम तोड़ दिया था। इस दर्दनाक हादसे में परिवार की सबसे बड़ी बेटी 19 वर्षीय काजल उर्फ लक्ष्मी गंभीर रूप से घायल हो गई, जो इस परिवार में अब अकेली जीवित बची है।
मासूमों की अर्थियों का वीडियो
Four casualty in Kanpur : गांव में एक साथ उठी चार अर्थियां,कांप गये लोगों की आत्मा
सोमवार की सुबह हिरनी गांव में जो मंजर था, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। मुकेश के दरवाजे पर लोगों की भीड़ लगी थी। आंगन में चार चारपाइयों पर चार शव सफेद कफन में लिपटे पड़े थे। फूलों की मालाएं रखी थीं। जैसे ही चारों अर्थियों को एक साथ उठाकर अंतिम यात्रा के लिए तैयार किया गया, वहां मौजूद महिलाओं की चीखों से पूरा गांव दहल गया। बुजुर्गों की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे।
जवान बेटियों के पिता का यूं चले जाना और पिता के सामने बेटियों का यूं खत्म हो जाना, यह गांव ने पहले कभी नहीं देखा था। हर किसी की जुबान पर यही था कि भगवान किसी दुश्मन को भी ऐसा दिन न दिखाए। गांव के ही एक बुजुर्ग ने रोते हुए कहा कि कल तक इसी आंगन में बेटियों की हंसी गूंजती थी, आज वहां सन्नाटा है।
हादसे की जगह पर आज भी मलबा पड़ा है और उसी मलबे के बीच मुकेश की मोटरसाइकिल दबी हुई है। लोग उस बाइक को देखकर भावुक हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह वही बाइक है जिस पर मुकेश अपनी बेटियों को स्कूल छोड़ने जाता था, बाजार से सामान लाता था। आज वह बाइक मलबे में दबी है और उसे निकालने वाला परिवार में कोई नहीं बचा। इस गम में सोमवार को हिरनी गांव के कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
इकलौती बची बेटी : जिस पर टूटा गमों का पहाड़
इस हृदय विदारक हादसे में अगर कोई जीवित बचा है तो वह है 19 साल की काजल। काजल उर्फ लक्ष्मी इस परिवार की सबसे बड़ी बेटी है। बताया जा रहा है कि हादसे में वह भी मलबे में दब गई थी, लेकिन ग्रामीणों ने उसे जीवित बाहर निकाल लिया और तुरंत अस्पताल पहुंचाया। उसकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन उसके ऊपर जो दुखों का पहाड़ टूटा है, उसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता।
कुछ ही दिन पहले काजल ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत अपनी शादी के लिए आवेदन किया था। किसे पता था कि शादी की खुशियां आने से पहले उसके जीवन में इतना बड़ा अंधेरा छा जाएगा। पिता और तीन बहनों को एक साथ खोने का गम उसकी आंखों में साफ देखा जा सकता है। वह बार-बार बेहोश हो रही है।
काजल ही अब इस परिवार की आखिरी उम्मीद और वंश है। प्रशासन ने भी काजल को ही केंद्र में रखकर सारी सहायता योजनाएं बनाई हैं। जब प्रशासन को राहत राशि के लिए दस्तावेजों की जरूरत पड़ी तो काजल के उसी सामूहिक विवाह वाले आवेदन से उसका आधार कार्ड और स्कूल से जुड़े दस्तावेज मिल पाए।
प्रशासन हरकत में: डीएम से लेकर तहसीलदार तक पहुंचे गांव
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। रविवार देर शाम कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह खुद हिरनी गांव पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया, परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार को मिलने वाली सभी सरकारी सहायता तुरंत उपलब्ध कराई जाए।
वहीं सोमवार सुबह जब गम और गुस्से में ग्रामीणों और परिजनों ने मुआवजे और तत्काल मदद की मांग को लेकर अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया, तो मौके पर घाटमपुर के तहसीलदार ओमप्रकाश पहुंचे। उन्होंने परिवार को समझाया, सांत्वना दी और मानवता के नाते दाह संस्कार की तात्कालिक व्यवस्थाओं के लिए अपनी तरफ से 10,000 रुपये की नकद सहायता प्रदान की। उनके समझाने के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए।
प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई है कि दैवीय आपदा राहत कोष के तहत मृतक आश्रित के रूप में काजल के बैंक खाते में 16 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चार मौतों पर 4-4 लाख के हिसाब से यह राशि दी जा रही है। इसके अलावा काजल को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान, राशन कार्ड, विधवा या निराश्रित पेंशन जैसी अन्य योजनाओं का लाभ भी दिलाने की तैयारी है। प्रशासन का कहना है कि काजल के भविष्य की पूरी जिम्मेदारी शासन उठाएगा।
यमुना के घाट पर हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई
दोपहर करीब 1 बजे प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए विशेष वाहनों से चारों शवों को हिरनी गांव से करीब 25 किलोमीटर दूर मूसानगर घाट ले जाया गया। यह घाट यमुना नदी के किनारे स्थित है। वहां पहले से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। यमुना के पवित्र तट पर विधि-विधान के साथ एक साथ चार चिताएं सजाई गईं। पंडितों ने मंत्रोच्चार के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई। जब चिताओं को मुखाग्नि दी गई तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। पिता और तीन बेटियों का एक साथ यूं पंचतत्व में विलीन हो जाना, हर किसी को अंदर तक झकझोर गया है।
यह हादसा एक चेतावनी है सभी कच्चे घरों के लिये चेतावनी
यह दर्दनाक हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। आज भी उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में हजारों परिवार ऐसे कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं, जो कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं। बरसात के मौसम में यह खतरा और भी बढ़ जाता है। मिट्टी की दीवारें पानी सोख लेती हैं और छत का वजन नहीं संभाल पातीं।
जरूरत है कि प्रशासन गांव-गांव जाकर ऐसे जर्जर मकानों का सर्वे करे और उनमें रहने वाले परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर पक्के मकान उपलब्ध कराए। अगर समय रहते मुकेश के परिवार को भी पक्का मकान मिल गया होता तो शायद आज चार जिंदगियां बच जातीं।
हिरनी गांव की यह घटना हमें सिखाती है कि आपदा कभी बता कर नहीं आती, लेकिन उससे बचाव के उपाय पहले से किए जा सकते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन काजल के लिए जो वादे कर रहा है, वह कितनी जल्दी पूरे होते हैं और क्या इस घटना के बाद जिले के अन्य जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों की सुध ली जाएगी। फिलहाल तो हिरनी गांव में पसरा मातम और चार अर्थियों का वह मंजर लोगों के दिलों से निकल नहीं पा रहा है।