Meerut Blue Drum Murder Case: मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा, 13 महीने बाद जज बोले- अधर्म पर सजा देना धर्म - Democracy Samachar
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मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा, 13 महीने बाद जज बोले- अधर्म पर सजा देना धर्म

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📌 मुख्य बिंदु (Highlights)
  • यूपी के मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने मुख्य आरोपियों मुस्का...
  • सौरभ राजपूत के हत्यारे मुस्कान और साहिल के फाइल वीडियो
  • उत्तर प्रदेश के मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड उर्फ ब्लू ड्रम हत्याकांड में आज बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को अद...

Meerut Blue Drum Murder Case: यूपी के मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने मुख्य आरोपियों मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। इस सनसनीखेज केस की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली, जिसमें 127 तारीखें पड़ीं और 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज हुए। फैसले के दौरान दोनों दोषी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए, जबकि कोर्ट में सौरभ की मां और भाई मौजूद रहे।

सौरभ राजपूत के हत्यारे मुस्कान और साहिल के फाइल वीडियो

Blue Drum Murder Case Verdict: उत्तर प्रदेश के मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड उर्फ ब्लू ड्रम हत्याकांड में आज बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला उर्फ मोहित को फांसी की सजा सुनाई है।

कोर्ट में सजा सुनाते हुए जज ने कहा, “अधर्म के काम पर सजा देना धर्म होता है। मुस्कान-साहिल आप दोनों ने ही सौरभ की नृशंस हत्या की है। इसलिए माफी स्वीकार नहीं होगी।” 

यह फैसला सुनते ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल से जुड़ी मुस्कान और साहिल फूट-फूट कर रोने लगे। कोर्ट रूम के बाहर वकीलों ने लड्डू बांटकर इस फैसले का स्वागत किया।

कोर्ट परिसर में सुनवाई के  दौरान मृतक सौरभ राजपूत के परिजन 

कोर्ट में क्या हुआ ? 

सजा सुनाने से पहले जिला जज ने दोनों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा। करीब 10 मिनट तक दोनों से बातचीत हुई।

जज ने मुस्कान से पूछा, “तुम अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या में दोषी हो, क्या सजा चाहती हो?”

इस पर मुस्कान ने रोते हुए कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वह अपनी छोटी बच्ची को गोद में लेकर पेशी में शामिल हुई थी।

इसके बाद जज ने साहिल से यही सवाल पूछा तो वह सिर झुकाकर चुपचाप खड़ा रहा, उसने कुछ नहीं कहा।

बचाव पक्ष की वकील के द्वारा सज़ा के बाद दी गई जानकारी

बचाव पक्ष की वकील रेखा जैन ने दलील दी कि यह रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस नहीं है, इसलिए मृत्युदंड न दिया जाए। उन्होंने कहा कि मुस्कान की दो छोटी बेटियां हैं और उसके माता-पिता बुजुर्ग हैं, इसलिए कम सजा दी जाए। बहस के दौरान वकील भावुक हो गईं।

अभियोजन पक्ष के वकील के द्वारा सजा के बाद दी गई जानकारी 

वहीं, अभियोजन पक्ष के डीजीसी केके चौबे और सौरभ के परिवार के वकील विजय बहादुर सिंह ने कहा कि यह रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस है। उन्होंने कहा, “इन्होंने सिर्फ हत्या नहीं की, बल्कि हत्या के बाद उसकी कलाई और सिर काटकर रात भर रखा। ये जानवरों से भी बदतर कृत्य है।

अभियोजन पक्ष की एक और वकील के द्वारा मीडिया को दी गई जानकारी 

इतने जघन्य अपराध में कम सजा मिलती है तो न्याय व्यवस्था का मजाक होगा।” कोर्ट ने अभियोजन की दलील को मानते हुए दोनों को मृत्युदंड और धारा 302 में 50 हजार और धारा 201 में 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।

जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के द्वारा दी गई जानकारी

क्या था पूरा मामला ?

यह हत्याकांड 3 मार्च 2025 का है। मूल रूप से ब्रह्मपुरी निवासी सौरभ राजपूत लंदन में काम करता था। वह अपनी पत्नी मुस्कान और परिवार से मिलने मेरठ आया था।

आरोप है कि मुस्कान का अपने बचपन के दोस्त साहिल शुक्ला के साथ प्रेम संबंध था। पति के लौटने के बाद मुस्कान ने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।

जांच में सामने आया कि 1 मार्च को मुस्कान ने एक डॉक्टर के पर्चे पर नींद की दवा खरीदी थी। 3 मार्च की रात खाने में नशीला पदार्थ देकर सौरभ को बेहोश किया गया और फिर धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी गई।

सबूत मिटाने के लिए शव को बाथरूम में ले जाकर कई टुकड़ों में काटा गया और एक बड़े नीले प्लास्टिक ड्रम में डालकर उसमें सीमेंट, बालू और पानी का घोल भर दिया गया।

हत्या के बाद दोनों 4 मार्च को शिमला, मनाली, कसोल घूमने चले गए। 13 दिन तक मुस्कान इंस्टाग्राम पर फोटो-वीडियो डालती रही ताकि लोगों को लगे कि सब ठीक है।

18 मार्च को सौरभ का भाई राहुल जब घर पहुंचा तो घर से बदबू आ रही थी और मुस्कान सवालों का जवाब नहीं दे पाई। तब पुलिस को बुलाया गया और ड्रम काटने पर सौरभ का शव बरामद हुआ।

कोर्ट परिसर में जज के द्वारा फांसी की सजा सुनाये जाने के बाद अधिवक्ताओं ने मिठाई बताकर मनाई खुशी 

22 गवाहों ने दिलाई सजा, ये बने अहम सबूत

इस केस में अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों को पेश कि

या। कोर्ट ने इन्हीं सबूतों के आधार पर दोनों को दोषी माना।

1. चश्मदीद दोस्त का बयान जिसने 3 मार्च की रात साहिल को सौरभ के घर जाते देखा था।

2. हत्या में इस्तेमाल चाकू, उस्तरा, ड्रम, सीमेंट-बालू की दुकानदारों की गवाही।

3. आलाकत्ल पर मिले मानव रक्त के निशान।

4. मुस्कान और साहिल की कॉल डिटेल और सोशल मीडिया चैटिंग।

5. होटल मैनेजर और कैब ड्राइवर अजब सिंह की गवाही, जो दोनों को 13 दिन तक पहाड़ों पर घुमाता रहा।

6. फोरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट।

फांसी का पूरा प्रोसेस क्या होगा ?

डीजीसी केके चौबे ने बताया कि अभी जजमेंट की कॉपी मिलना बाकी है। एक हफ्ते बाद इस फैसले को हाईकोर्ट में कन्फर्मेशन के लिए भेजा जाएगा।

अगर हाईकोर्ट फांसी को कन्फर्म करता है तो फाइल सुप्रीम कोर्ट जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के बाद फाइल राष्ट्रपति के पास दया याचिका के लिए जाएगी। राष्ट्रपति से स्वीकृति के बाद ही फांसी की तारीख तय होगी। इस पूरी प्रक्रिया में 2 से 3 साल लग सकते हैं। इस दौरान हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट या राष्ट्रपति से सजा कम भी हो सकती है।

मेरठ जेल के इतिहास में पहली महिला को फांसी

वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में आखिरी बार 1975 में करम सिंह को फांसी दी गई थी। उसके बाद यहां किसी को फांसी नहीं हुई। निठारी कांड के सुरेंद्र कोली को 2014 में यहां फांसी देने की तैयारी हुई थी, लेकिन टल गई थी।

अगर मुस्कान और साहिल को फांसी होती है तो साहिल मेरठ जेल में फांसी पाने वाला दूसरा पुरुष होगा, जबकि मुस्कान इस जेल के इतिहास में फांसी पाने वाली पहली महिला होगी। सजा के बाद दोनों को विशेष बैरक में शिफ्ट किया जाएगा।

मुस्कान को बैरक नंबर 12-बी से निकालकर विशेष बैरक में रखा जाएगा और उसे क्रीम कलर की साड़ी पहननी होगी, जबकि साहिल को सफेद कुर्ता-पजामा पहनना होगा।

सजा के बाद मृतक सौरभ राजपूत के भाई ने दी जानकारी 

परिवार की प्रतिक्रिया

सजा के ऐलान के बाद सौरभ की मां रेनू रो पड़ीं और कहा, “न्याय तो बहुत शांति से मिला है। मेरे बेटे के हत्यारों को फांसी मिल गई।” सौरभ के भाई बबलू ने कहा, “हमें उम्मीद थी कि इंसाफ मिलेगा। हमने शुरू से फांसी की ही मांग की थी।”

वहीं, मुस्कान के माता-पिता ने कोर्ट को पत्र लिखकर कहा था कि मुस्कान को चाहे जो सजा हो, हमें कोई मतलब नहीं। हमारे लिए वह मर चुकी है। हमें उसकी बेटी से भी कोई मतलब नहीं।

पूरी घटना पर वरिष्ठ  पुलिस अधीक्षक के द्वारा दी गई जानकारी

मेरठ के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने कहा कि मेरठ पुलिस और अभियोजन के सार्थक प्रयास से यह सजा मिली है, इसमें काम करने वाले सभी लोगों को पुरस्कृत किया जाएगा।

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