Kanpur Bar Boycott: कानपुर में अधिवक्ताओं का बड़ा ऐलान, राष्ट्रीय लोक अदालत का बहिष्कार, प्रांतीय सम्मेलन में गूंजा - अब हक लेकर रहेंगे,हर बुधवार को पूरे प्रदेश में न्यायिक कार्य ठप - Democracysamachar.com
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Kanpur Bar Boycott: कानपुर में अधिवक्ताओं का बड़ा ऐलान, राष्ट्रीय लोक अदालत का बहिष्कार, प्रांतीय सम्मेलन में गूंजा – अब हक लेकर रहेंगे,हर बुधवार को पूरे प्रदेश में न्यायिक कार्य ठप

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📌 मुख्य बिंदु (Highlights)
  • Kanpur Bar Boycott: कानपुर की कचहरी में शुक्रवार को अधिवक्ताओं के आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। बार एसोसिएशन और दि लॉयर...
  • अधिवक्ताओं की इस हड़ताल का सीधा असर वादकारियों पर पड़ रहा है। अदालतों में तारीखें पड़ रही हैं, रजिस्ट्री कार्यालय में...
  • यह दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय सम्मेलन बार एसोसिएशन परिसर में चल रहा है। शुक्रवार को दूसरे दिन के सत्र का शुभारंभ बार एसो...

Kanpur Bar Boycott: कानपुर की अदालतों में अधिवक्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। दो दिवसीय प्रांतीय सम्मेलन के दौरान बार और लायर्स एसोसिएशन ने अपनी लंबित मांगों, जिनमें एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करना और वरिष्ठ वकीलों के लिए पेंशन योजना प्रमुख है, को लेकर बड़े आंदोलन का फैसला किया है। इसी कड़ी में शनिवार को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत से दूरी बनाने का ऐलान किया गया है, जिसके चलते कचहरी में न्यायिक कामकाज पूरी तरह से ठप होता नजर आ रहा है।

 

 

Kanpur Bar Boycott: कानपुर की कचहरी में शुक्रवार को अधिवक्ताओं के आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। बार एसोसिएशन और दि लॉयर्स एसोसिएशन ने शनिवार को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत का पूर्ण बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। यह निर्णय दो दिवसीय प्रांतीय अधिवक्ता सम्मेलन के दूसरे दिन लिया गया, जिसके बाद से ही जिला अदालत से लेकर रजिस्ट्री कार्यालय तक में सन्नाटा पसरा हुआ है।

अधिवक्ताओं की इस हड़ताल का सीधा असर वादकारियों पर पड़ रहा है। अदालतों में तारीखें पड़ रही हैं, रजिस्ट्री कार्यालय में काम बंद है और स्टांप वेंडर से लेकर फोटोकॉपी की दुकानों तक पर ताले लटके हुए हैं। अधिवक्ता समाज ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ बहिष्कार नहीं, बल्कि अपने सम्मान और अधिकारों की बड़ी लड़ाई की शुरुआत है, और यह लड़ाई कानपुर से शुरू होकर पूरे उत्तर प्रदेश में फैलेगी।

सम्मेलन के दूसरे दिन हुआ बड़ा फैसला

यह दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय सम्मेलन बार एसोसिएशन परिसर में चल रहा है। शुक्रवार को दूसरे दिन के सत्र का शुभारंभ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र अवस्थी, महामंत्री बिनय कुमार मिश्रा, दि लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र वर्मा और महामंत्री राजीव यादव ने संयुक्त रूप से किया। मंच पर प्रदेश के करीब 30 जिलों से आए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महामंत्री मौजूद रहे।

सम्मेलन में अधिवक्ताओं की लंबे समय से लंबित मांगों पर गंभीर मंथन हुआ। बार महामंत्री बिनय मिश्रा ने सर्वसम्मति से कई प्रस्ताव रखे, जिन्हें सभी जिलों के प्रतिनिधियों ने ध्वनि मत से पास कर दिया।

क्या हैं अधिवक्ताओं की मुख्य मांगें ?

अधिवक्ताओं ने जिन प्रमुख मुद्दों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंका है, वे इस प्रकार हैं:

1. एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो: अधिवक्ताओं के साथ आए दिन हो रही अभद्रता, मारपीट और उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार जल्द से जल्द एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करे। यह उनकी सबसे बड़ी मांग है।

2. वरिष्ठ अधिवक्ताओं को पेंशन: 65 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सम्मानजनक पेंशन और स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दी जाए, ताकि बुढ़ापे में उन्हें आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

3. वादों का गैर जनपद ट्रांसफर बंद हो: अधिवक्ताओं के मुकदमों को बिना ठोस कारण के दूसरे जिलों में ट्रांसफर करने के फैसले को वापस लिया जाए, क्योंकि इससे वादकारियों और वकीलों दोनों को परेशानी होती है।

4. हड़ताल की अंडरटेकिंग न ली जाए: अदालतों द्वारा हड़ताल के दौरान वकीलों से जो अंडरटेकिंग ली जाती है, उसे समाप्त किया जाए। वकीलों ने कहा कि विरोध करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।

5. युवा अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड: नए वकीलों के लिए 5 साल तक स्टाइपेंड की व्यवस्था हो, ताकि वे शुरुआती दौर में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार का प्रस्ताव पास

सम्मेलन में सबसे बड़ा निर्णय शनिवार 13 सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार को लेकर लिया गया। दोनों एसोसिएशनों ने संयुक्त रूप से कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तब तक वे किसी भी लोक अदालत में सहयोग नहीं करेंगे।

इतना ही नहीं, कानपुर से यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि अब हर बुधवार को पूरे उत्तर प्रदेश में अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को भेजा गया है और गैर जनपदों से आए सभी प्रतिनिधियों से अपील की गई है कि वे अपने-अपने जिलों में भी इस बहिष्कार को लागू कराएं।

अदालतों में सन्नाटा, रजिस्ट्री कार्यालय में हंगामा

इस बहिष्कार और कार्य से विरत रहने के फैसले का असर शुक्रवार सुबह से ही दिखने लगा।

जिला अदालत परिसर में अधिकांश कोर्ट खाली रहीं। जो वादकारी अपने मुकदमों की पैरवी के लिए आए थे, उन्हें सिर्फ तारीख लेकर लौटना पड़ा। कई कोर्ट में जज अकेले बैठे रहे क्योंकि अधिवक्ता पेश नहीं हुए।

उधर, कुछ आक्रोशित अधिवक्ताओं का एक समूह रजिस्ट्री दफ्तर पहुंच गया। वहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए रजिस्ट्री का काम बंद करा दिया। इससे जमीन की रजिस्ट्री कराने आए लोगों को बिना काम हुए ही वापस लौटना पड़ा।

अधिवक्ताओं के समर्थन में कचहरी परिसर में स्थित स्टांप वेंडरों और टाइपिस्टों ने भी अपनी दुकानें बंद कर दीं। फोटोकॉपी की दुकानें भी बंद रहने से वादकारियों को दस्तावेजों की नकल लेने में भी परेशानी हुई।

अधिवक्ताओं की हुंकार – कानपुर से शुरू होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन

सम्मेलन में अधिवक्ताओं ने एक स्वर में कहा, “हम अब अपना हक लेकर रहेंगे।” वक्ताओं ने कहा कि अधिवक्ता समाज न्याय व्यवस्था की रीढ़ है। अगर वकील ही सुरक्षित नहीं होगा तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा।

गैर जिलों से आए अधिवक्ता नेताओं ने कहा कि कानपुर हमेशा से क्रांतिकारी धरती रही है और यहां से शुरू होने वाला हर आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कानपुर के इस आंदोलन में वे पूरी तरह से साथ हैं और अपने-अपने जिलों में भी लोक अदालत का बहिष्कार और बुधवार को कार्य से विरत रहने के प्रस्ताव को लागू कराएंगे।

बार और लायर्स एसोसिएशन ने कहा कि सम्मेलन के बाद एक संयुक्त मांग पत्र तैयार कर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश और मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। अगर इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।

 

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