17 करोड़ की नकली सिक्का फैक्ट्री का हुआ पर्दाफाश,10वीं फेल लूथरा निकला सरगना, 5 रुपये से शुरू किया था काला कारोबार अब 20 रुपये के सिक्कों से कमा रहा था करोड़ों

- सहारनपुर पुलिस ने नकली सिक्के बनाकर बाजार में चलाने वाले अंतरराज्यीय गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में मास्टर...
- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाली एक बड़ी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जिसने पूरे स...
- यह कहानी एक ज्वैलरी शॉप में चोरी से शुरू होकर 17 करोड़ की नकली सिक्का फैक्ट्री तक पहुंचती है, जो अपराध की दुनिया का ए...
Saharanpur Fake Coin Factory Busted: सहारनपुर पुलिस ने नकली सिक्के बनाकर बाजार में चलाने वाले अंतरराज्यीय गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में मास्टरमाइंड सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से 20-20 रुपये के 6400 नकली सिक्के, 6 मशीनें और सिक्के बनाने का पूरा साजो-सामान बरामद किया है। पूछताछ में पता चला है कि गैंग प्रतिदिन करीब 12 हजार सिक्के बनाता था और अब तक करोड़ों के नकली सिक्के बाजार में खपा चुका है।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान आरोपियों की पेशी
Saharanpur Fake Coin Factory Busted: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाली एक बड़ी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जिसने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया है। इस फैक्ट्री में रोजाना 10 से 12 हजार 20 रुपये के नकली सिक्के बनाए जा रहे थे और अब तक 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में खपाए जा चुके हैं। पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मुख्य सरगना 10वीं फेल उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह भी शामिल है।
यह कहानी एक ज्वैलरी शॉप में चोरी से शुरू होकर 17 करोड़ की नकली सिक्का फैक्ट्री तक पहुंचती है, जो अपराध की दुनिया का एक हैरान कर देने वाला सफर है।
कौन है सरगना उपकार लूथरा ? ज्वैलरी चोरी से नकली सिक्का किंग बनने की कहानी
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड उपकार लूथरा है। वह दिल्ली के उत्तम नगर में रहता था और पढ़ाई में 10वीं फेल है। शुरुआत में उसने दिल्ली के उत्तम नगर में एक ज्वैलरी शॉप में चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। चोरी के पैसे से उसने कपड़ों की दुकान खोली, लेकिन वह कारोबार नहीं चला और दुकान बंद हो गई।
इसी दौरान उसकी मुलाकात देहरादून के कुख्यात जालसाज गुलशन गंभीर से हुई। यह मुलाकात उसकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। गुलशन गंभीर नकली सिक्के बनाने में माहिर था। उपकार ने 1997 में उससे नकली सिक्के बनाने का हुनर सीखा और धीरे-धीरे इस अवैध धंधे में बड़ा नाम बन गया।
पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि उपकार का यह सफर 1990 से शुरू हुआ था। 1999 में कनॉट प्लेस पुलिस ने उसे पहली बार नकली सिक्के बनाने के मामले में गिरफ्तार किया था। जेल से बाहर आने के बाद उसने अपना नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तक फैला लिया। पुलिस से बचने के लिए वह कुछ समय नेपाल में भी जाकर रहा।
साल 2017 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे हरियाणा के कोंडली से गिरफ्तार किया था। उस वक्त उस पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसके पास से 5 रुपये के 8500 रुपये के नकली सिक्के बरामद हुए थे।
सहारनपुर में कैसे चल रही थी 17 करोड़ की फैक्ट्री ?
ताजा मामले में सहारनपुर पुलिस को सूचना मिली थी कि जिले में एक सुनसान इलाके में नकली सिक्कों की फैक्ट्री चल रही है। छापेमारी करने पर पुलिस भी हैरान रह गई। वहां 6 हाई-टेक मशीनें लगी हुई थीं, जो एक दिन में 10 से 12 हजार 20 रुपये के सिक्के बना रही थीं।
मौके से पुलिस ने 6400 पूरी तरह से बने हुए 20 रुपये के नकली सिक्के और करीब 5 लाख रुपये के अधबने सिक्के बरामद किए हैं। पुलिस का अनुमान है कि अगर यह फैक्ट्री कुछ महीने और चलती तो 17 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में आ जाते।
पुलिस ने आरोपियों से बरामद किए नकली सिक्के
कैसे खपाते थे नकली सिक्के? शराब ठेके और टोल प्लाजा थे टारगेट
गिरोह का तरीका बहुत शातिर था। वे खुद सिक्के बाजार में नहीं चलाते थे। इसके लिए उन्होंने एजेंटों का जाल बिछा रखा था। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि 20 रुपये का एक नकली सिक्का बनाने में सिर्फ 5 से 6 रुपये का खर्च आता था। इस सिक्के को वे अपने एजेंटों को 12 से 15 रुपये में बेचते थे। एजेंट आगे इसे 20 रुपये में बाजार में चला देता था, जिससे उसे 5 से 8 रुपये का सीधा मुनाफा होता था।
नकली सिक्के खपाने के लिए उन्होंने ऐसी जगहें चुनीं जहां नकदी का लेनदेन ज्यादा होता है और सिक्कों की जांच नहीं होती।
1. शराब के ठेके: यह उनकी पहली पसंद थी, क्योंकि वहां शाम होते ही भीड़ लगती है और सिक्कों की गिनती जल्दबाजी में होती है।
2. टोल प्लाजा: टोल प्लाजा पर फुटकर पैसों का सबसे ज्यादा लेनदेन होता है।
3. किराना दुकानें: छोटी-छोटी किराना दुकानों पर भी ये सिक्के आसानी से चलाए जा रहे थे।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह के द्वारा दी गई बाइट
अब पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के पास से मिले 7 रजिस्टरों की जांच कर रही है, जिनमें एजेंटों के नाम और लेनदेन का पूरा हिसाब लिखा हुआ है। इन रजिस्टरों से इस काले कारोबार के पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े और भी लोगों की गिरफ्तारी होगी।
इस खबर को पढ़े….