Chaos in Kanpur Court: कानपुर कचहरी परिसर राष्ट्रीय लोक अदालत के दिन अधिवक्ताओं ने किया हंगामा,परिसर में गूंजे बहिष्कार के नारे,पुलिस कमिश्नर ने संभाली स्थिति
- Chaos in Kanpur Court: कानपुर दीवानी कचहरी में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान अधिवक्ताओं ने कामकाज ठप करा दिय...
- Chaos in Kanpur Court: कानपुर की दीवानी कचहरी में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन के दौरान जमकर हंगामा और अफरा...
- लगभग दो घंटे तक चले इस हंगामे की सूचना पर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल भारी फोर्स के साथ कचहरी पहुंचे। वहां एक मार्मिक दृ...
Chaos in Kanpur Court: कानपुर दीवानी कचहरी में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान अधिवक्ताओं ने कामकाज ठप करा दिया। बार एसोसिएशन और लॉयर्स एसोसिएशन के महामंत्रियों के नेतृत्व में पहुंचे वकीलों ने जमकर नारेबाजी करते हुए बहिष्कार का ऐलान किया और अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं को कक्षों से बाहर निकाल दिया। इस दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
Chaos in Kanpur Court: कानपुर की दीवानी कचहरी में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन के दौरान जमकर हंगामा और अफरातफरी का माहौल बन गया। बार एसोसिएशन और लॉयर्स एसोसिएशन के आह्वान पर दो दर्जन से अधिक वकीलों ने लोक अदालत के बहिष्कार को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते कचहरी परिसर अखाड़ा बन गया। काम कर रहे वकीलों और बहिष्कार कर रहे वकीलों के बीच तीखी नोंकझोंक के बाद हाथापाई तक की नौबत आ गई। इस हंगामे से अदालत में आए सैकड़ों वादकारी दहशत में आ गए और निस्तारण के लिए लगे कैंप छोड़कर भाग निकले।
लगभग दो घंटे तक चले इस हंगामे की सूचना पर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल भारी फोर्स के साथ कचहरी पहुंचे। वहां एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जब सजेती से अपने तीन छोटे-छोटे बच्चों के साथ आई एक विधवा महिला पुलिस कमिश्नर के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने लगी। हंगामे के कारण न्याय व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई थी, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा।
दो दिन के प्रांतीय सम्मेलन के बाद लिया गया था बहिष्कार का फैसला
दरअसल, बार एसोसिएशन और लॉयर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में पिछले दो दिनों से कचहरी परिसर में प्रांतीय सम्मेलन चल रहा था। सम्मेलन के आखिरी दिन शुक्रवार को मंच से ऐलान किया गया था कि शनिवार को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत का अधिवक्ता बहिष्कार करेंगे। उनकी कुछ मांगें हैं, जिन्हें लेकर वह विरोध जता रहे थे।
लेकिन शनिवार सुबह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत अपने तय समय सुबह 10 बजे शुरू कर दी गई। बड़ी संख्या में वादकारी अपने पुराने मुकदमों, बैंक लोन, बीमा और केस्को से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए कचहरी पहुंचने लगे। दीवानी न्यायालय परिसर में बैंक, बीमा कंपनियों और केस्को के अलग-अलग काउंटर और शिविर लगाए गए थे, जहां सुलह-समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा किया जा रहा था।

नारेबाजी करते पहुंचे वकील, काम कर रहे अधिवक्ताओं से हुई झड़प
सुबह करीब 11 बजे बार एसोसिएशन के महामंत्री बिनय मिश्रा और लॉयर्स एसोसिएशन के महामंत्री राजीव यादव के नेतृत्व में लगभग दो दर्जन अधिवक्ताओं का एक समूह नारेबाजी करते हुए दीवानी न्यायालय परिसर में पहुंचा। वकील “अधिवक्ता एकता जिंदाबाद” और “लोक अदालत का बहिष्कार करो” के नारे लगा रहे थे।
उन्होंने परिसर में घूम-घूम कर उन अधिवक्ताओं से काम बंद करने की अपील की जो लोक अदालत में अपने मुवक्किलों के मामलों की पैरवी कर रहे थे। इसी दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने काम जारी रखने की बात कही, जिस पर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई। बहस इतनी बढ़ गई कि नौबत गाली-गलौज और हाथापाई तक पहुंच गई। बीच-बचाव करने आए अन्य अधिवक्ताओं ने किसी तरह मामला शांत कराया, लेकिन तब तक पूरे परिसर में अफरातफरी मच चुकी थी।
हंगामा देखकर लोक अदालत में निस्तारण के लिए बैठे बैंक कर्मी, बीमा कंपनी के अधिकारी और केस्को के कर्मचारी अपने कैंप छोड़कर इधर-उधर हो गए। वादकारी डर के मारे कभी एक तल से दूसरे तल पर भागते नजर आए।
पुलिस कमिश्नर के सामने फूटा विधवा का दर्द, बोली- साहब काम करा दो
हंगामे की सूचना मिलते ही कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल फोर्स के साथ कचहरी पहुंचे। उन्होंने पूरे परिसर में भूतल से लेकर पांचवें तल तक पुलिसकर्मियों के साथ गश्त की। हालांकि पुलिस के पहुंचने तक हंगामा करने वाले वकील शांत हो चुके थे, लेकिन व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी थी।
इसी दौरान सजेती थाना क्षेत्र से आई सरोज नाम की एक महिला अपने भतीजे के तीन छोटे बच्चों के साथ पुलिस कमिश्नर के पास पहुंची और हाथ जोड़कर रोने लगी। उसने बताया कि उसके भतीजे अभय की दो साल पहले मौत हो चुकी है। उसने मरने से पहले क्रेडिट कार्ड से 70 हजार रुपये का लोन लिया था। उसकी मौत के बाद से उस लोन पर लगातार ब्याज बढ़ रहा है और बैंक के रिकवरी एजेंट आए दिन घर आकर परेशान करते हैं।
सरोज ने बताया कि वह पिछले कई महीनों से बैंक के चक्कर लगा रही है ताकि लोक अदालत में इस मामले का निस्तारण हो सके। शनिवार को वह उम्मीद लेकर तीन अनाथ बच्चों के साथ कचहरी आई थी, लेकिन यहां वकीलों के हंगामे के कारण कोई उसकी सुनने को तैयार नहीं था। वकील उसे वापस लौट जाने के लिए कह रहे थे।
महिला की गुहार सुनकर पुलिस कमिश्नर ने तुरंत मौके पर मौजूद न्यायिक अधिकारियों से बात की। अधिकारियों ने महिला को आश्वासन दिया कि उसके भतीजे के लोन मामले का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा। इसके बाद कहीं जाकर महिला शांत हुई।

लॉ के छात्रों का टूटा सपना, बिना कुछ सीखे लौटे कॉलेज
इस हंगामे का असर कानूनी पढ़ाई कर रहे छात्रों पर भी पड़ा। एसजे महाविद्यालय के करीब 30 लॉ स्टूडेंट्स का एक ग्रुप शनिवार को कानपुर कचहरी में प्रैक्टिकल नॉलेज लेने आया था। उन्हें दिखाना था कि राष्ट्रीय लोक अदालत में किस तरह से वादों का निस्तारण होता है और सुलह-समझौते की प्रक्रिया क्या होती है।
लेकिन कचहरी में घुसते ही उन्होंने वकीलों को लड़ते-झगड़ते और नारेबाजी करते देखा तो सभी छात्र सहम गए। कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से सभी छात्रों को वापस कॉलेज बुला लिया। छात्र बिना कोई कानूनी प्रक्रिया समझे ही निराश होकर वापस लौट गए।
पुलिस और बार के बीच वार्ता के बाद बहाल हुई व्यवस्था
हंगामे के बाद पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल, न्यायिक अधिकारियों और बार व लॉयर्स एसोसिएशन के महामंत्रियों के बीच एक बंद कमरे में वार्ता हुई। बार के पदाधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने किसी भी वादकारी को परेशान नहीं किया है, न ही किसी के साथ अभद्रता की है। उन्होंने सिर्फ अपने साथी अधिवक्ताओं से काम न करने का निवेदन किया था।
करीब दो घंटे तक चले गतिरोध के बाद दोपहर लगभग डेढ़ बजे स्थिति सामान्य हो सकी। इसके बाद दोबारा लोक अदालत की कार्यवाही शुरू हुई और वादकारियों के मामलों की सुनवाई की गई। हालांकि, हंगामे के कारण सैकड़ों वादकारी सुबह से ही कचहरी में भटकते रहे और उनका काफी समय बर्बाद हो गया।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि अधिवक्ताओं के आपसी विरोध के चलते आम जनता को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोक अदालत का मकसद ही आम लोगों को त्वरित न्याय दिलाना होता है, लेकिन जब उसी दिन हंगामा हो जाए तो न्याय की उम्मीद लेकर आए गरीब और पीड़ित लोगों का भरोसा टूट जाता है।